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नए और पुराने लेखकों के प्रोत्साहन की शानदार पहल

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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‘यह खबर मेरे कानों में किसी खुशखबरी की तरह उतर रही है।’- अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ‘शब्द सम्मान’ दिए जाने की घोषणा पर बुधवार को प्रख्यात लेखक पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कुछ इस तरह से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमर उजाला की ओर से सम्मान की घोषणा होना पूरे हिंदी और भारतीय भाषा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में अखबारों और अन्य मीडिया माध्यमों में साहित्य, कला व लेखन की जगह पूरी तरह खत्म कर दी गई है। ज्यादातर मीडिया माध्यमों में इसके लिए कोई स्थान नहीं बचा। जबकि साहित्य, कला और अन्य रचनात्मक विधाओं के लिए हमारे सामाजिक जीवन में एक जगह जरूर होनी चाहिए। कहा भी कहा गया है कि ‘साहित्य, संगीत, कला विहीन:, साक्षात पशु पुच्छ विषाण हीन:’। इसलिए साहित्य व कलाओं की उपस्थिति में जीवन की सार्थकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपने विचारों से संस्कृति व सभ्यता को अंलकृत करने वाले रचनाकारों का अवदान सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
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उन्होंने सम्मान की अलग-अलग श्रेणियां बनाए जाने पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि नए लेखकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही प्रतिष्ठित और स्थापित लेखकों की बेहतरी के लिए भी काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने अलग-अलग श्रेणियां बनाकर सभी तरह के लेखकों की बेहतरी के लिए सोचा है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि थाप में नए रचनाकारों और छाप में वरिष्ठ व स्थापित रचनाकारों को बराबर पुरस्कार राशि प्रदान की जा रही है। बेहतर होता कि वरिष्ठ लेखकों के लिए यह पुरस्कार राशि कुछ अधिक होती। उन्होंने आकाशदीप अलंकरण में पुरस्कार राशि पांच लाख रुपये रखने पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार राशि बेहद सम्मानजनक है।



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