ब्यूरो/अमर उजाला
मुनिकीरेती।
ग्राम सेवा संस्थान और एकता विकास समिति की ओर से महिला स्वयं सहायता समूह और संयुक्त देयता समूह के कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें बताया गया कि समूहों का मुख्य उद्देश्य गांवों में महिलाओं को संगठित कर उनमें बचत भावना और आय प्रबंधन क्षमता को बढ़ावा देकर स्वरोजगार से जोड़ना है, जिससे वह आत्मनिर्भर बन सकें।
बुधवार को ढालवाला में नाबार्ड के महाप्रबंधक सत्यनारायण चालिया की अध्यक्षता में विभिन्न संस्थाओं और समूहों की बैठक हुई। जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। मगर बैंक सिक्योरिटी नहीं होने की वजह से महिलाओं को बैंकों से स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। जिसके निराकरण के लिए नाबार्ड ने महिला स्वयं सहायता समूह और संयुक्त देयता समूह प्रणाली को विकसित किया है। जिसमें महिलाओं का समूह को बैंक सिक्योरिटी में सहयोग मिलता है, जिससे महिलाएं अपनी जरुरतों और स्वरोजगार के लिए बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने व इसके लिए प्रेरित करने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। जिससे महिलाएं स्वावलंबी बन सकें, कहा कि यह कदम राज्य के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। बताया कि संयुक्त देयता समूह योजना के अंतर्गत भूमिहीन, पट्टेदार और छोटे, मझौले किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि नाबार्ड महिला समूहों को बैंकों से जोड़ने के साथ ही कई तरह से प्रशिक्षित कर रहा है, जिसके तहत अगरबत्ती बनाना, जूस, अचार, सिलाई, बुनाई, पापड़ बनाना, बैग और रिंगाल आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस मौके पर जिला विकास प्रबंधक कृष्णा सिंह, राजेश्वर उनियाल आदि मौजूद थे।