ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सह सर कार्यवाह डॉ.कृष्ण गोपाल के अनुसार, उत्तराखंड से पलायन करने वाले 80 फीसदी से ज्यादा लोग स्लम में रह रहे हैं। शुक्रवार को यहां दून विश्वविद्यालय में आयोजित डॉ.नित्यानंद हिमालयी शोध एवं अध्ययन केंद्र के शिलान्यास कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि वास्तव में स्थिति खराब है।
डॉ.कृष्ण गोपाल ने कहा कि कई पहाड़ी देशों की भौगोलिक स्थितियां हमसे खराब हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी आमदनी हमसे कहीं अच्छी है। हमारे पास तमाम संसाधन हैं, लेकिन हम फिर भी पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से पलायन करने वाले 80 फीसदी लोग स्लम में रह रहे हैं। यहां अपने घर छोड़कर जाने वाले स्लम में एक-एक कमरे में परिवार पाल रहे हैं।
हालांकि, कार्यक्रम के बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या आरएसएस के किसी सर्वे के आधार पर उन्होंने यह आंकड़ा पेश किया है तो उन्होंने इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह तो साफ दिख रहा है। बाद में वह कहने लगे 80 नहीं तो मान लो 50 फीसदी तो स्लम में रहते ही हैं। सीएम त्रिवेंद्र रावत के सामने यह मुद्दा उठाया गया तो उन्होंने भी डॉ.कृष्ण गोपाल का समर्थन किया। कहा कि पलायन करने वाले ज्यादातर लोगों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। उनकी स्थिति बहुत ज्यादा खराब है और वे घर लौटना चाहते हैं।
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तीन चीजें सुधरेंगी तो रुकेगा पलायन
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी के कारण पलायन सबसे ज्यादा हो रहा है। अगर हम पहाड़ में यह तीन चीजें उपलब्ध करा सकें तो काफी हद तक मजबूरी के पलायन को रोकने में कामयाब हो सकते हैं।