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आयुर्वेद विवि : कार्य परिषद् की बैठक पर विवाद

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आयुर्वेद विवि : कार्य परिषद् की बैठक पर विवाद
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति का कार्यकाल खत्म होने से महज तीन दिन पहले कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई है। आनन-फानन में बुलाई गई बैठक की वजह से विवाद पैदा हो गया है। क्योंकि, शासनादेश के मुताबिक, कुलपति का कार्यकाल खत्म होने के तीन माह पहले तक ऐसी कोई बैठक या आयोजन नहीं हो सकता है।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय और विवादों का चोली-दामन का साथ है। भर्ती की स्क्रूटनी में उप कुलसचिव और कुलसचिव के बीच विवाद के बाद अब कार्य परिषद की बैठक बुलाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्य परिषद के सदस्यों के अनुसार, इस समय कोई बैठक बुलाना नियम विरुद्ध है। दरअसल, विश्वविद्यालय में 12 दिसंबर को कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई है। जबकि, कार्यवाहक कुलपति डॉ.अरुण कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल 15 दिसंबर को पूरा हो रहा है।
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वहीं, प्रदेश में जारी शासनादेश के मुताबिक, किसी विवि में कुलपति का कार्यकाल पूरा होने के तीन महीने पहले तक अकादमिक परिषद या कार्यकारी परिषद की बैठक नहीं बुलाई जा सकती है। इससे पहले दून विवि में कार्यवाहक कुलपति प्रो. कुसुम अरुणाचलम् ने भी आठ दिसंबर 2017 को कार्यकारी परिषद की बैठक बुलाई थी। जबकि, उनका कार्यकाल भी तीन माह से कम बचा था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शासन के आदेश पर बैठक रद्द हुई थी।
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कुछ सेल्फ फाइनेंस के छात्रों का स्टाइपंड का मामला अटका हुआ है। इसके निस्तारण के लिए ही कार्यकारी परिषद की बैठक बुलाई गई है। अब नियम के हिसाब से यह गलत है या सही, यह कहना मुश्किल है।
-प्रो.अनूप कुमार गक्खड़, कुलसचिव, आयुर्वेद विश्वविद्यालय
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