लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग। किसानों को फसलों पर होने वाले नुकसान को कम करने के लिए चल रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को दिए जाने की जिम्मेदारी अब उद्यान विभाग के हवाले है। इन दिनों विभाग किसानों को सब्जियों की फसलों का बीमा कराकर नुकसान को कम करने की कवायद में जुटा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसान विभाग के जरिए या ऑनलाइन आवेदन कर भी फसलों का बीमा कर सकते हैं।
चमोली जिले के जोशीमठ, घाट, नारायणबगड़, थराली और देवाल ब्लाकों में आलू की फसलों की बंपर पैदावार होती है। कभी मानसून तो कभी दैवी आपदा या अन्य कारणों से किसानों को फसलों पर नुकसान उठाना पड़ता है। इसके लिए विभाग किसानों की फसलों का बीमा कर नुकसान को कम करने की कवायद कर रहा है। जिला उद्यान अधिकारी एसएल शाह के मुताबिक जिले के सभी ब्लाकों में आलू की खेती 542 हेक्टेयर में की जाती है। इससे प्रतिवर्ष औसतन 6064 मीट्रिक टन आलू की पैदावार किसान करते हैं। कहा कि तय दरों के मुताबिक किसान 75 रुपये प्रति नाली की दर से बीमा करा सकते हैं। इसका नुकसान होने पर किसानों को 1500 रुपये प्रति नाली के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। शाह ने बताया कि जिले में टमाटर को भी आलू के साथ 75 रुपये प्रति नाली के स्लैब में रखा गया है, जबकि 2045 हेक्टेयर में होने वाली मटर, शिमला मिर्च, बंद और फूलगोभी, मिर्च को 60 रुपये प्रति नाली के स्लैब में रखते हुए 1200 रुपये प्रति नाली मुआवजे का प्रावधान रखा गया है। यही नहीं सबसे अधिक अदरक की फसल पर किसानों को प्रीमियम की राशि चुकानी पड़ेगी। अदरक की फसल का मुआवजा 100 रुपये प्रति नाली के प्रीमियम पर 2000 रुपये तय किया गया है।
टोल फ्री नंबर से ले सकते हैं जानकारी
कर्णप्रयाग। किसान टॉल फ्री नंबर 18001030061 पर भी फसल बीमा की जानकारी और आवेदन संबंधी जानकारी जुटा सकते हैं। बीमा कंपनी की वेबसाइट 222.ड्डद्बष्शद्घद्बठ्ठड्डठ्ठष्द्ग.ष्शद्व पर ऑनलाइन आवेदन कर फसल बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।
किसानों ने बताया लाभदायक
कर्णप्रयाग। ब्लाक के प्रगतिशील किसान गिरीश नौटियाल ने योजना को किसानों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकतर खेती बारिश पर निर्भर हैं, जबकि जंगली जानवर भी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में फसल बीमा किसानों को कुछ राहत दे सकती है।