राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांग जन सशक्तीकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) में भौतिक संपदा दिवस मनाया गया, जिसमें दृष्टि दिव्यांगजनों को पर्यावरण संरक्षण की जानकारी दी गई। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले दृष्टि दिव्यांग बच्चों को सम्मानित किया गया।
शुक्रवार को राजपुर रोड स्थित संस्थान में कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक नचिकेता राउत व नेशनल एकेडमी ऑफ डायरेक्ट एक्सचेंज नागपुर के आईआरएस अफसर सौरव शर्मा ने किया। उन्होंने दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा की सराहना की। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने बच्चों को पर्यावरण का महत्व बताया। इससे पूर्व विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. गीतिका माथुर ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में दृष्टि दिव्यांग बच्चों की ओर से वेस्ट सामग्री से गमले बनाने के कार्यों की सभी ने सराहना की। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले दृष्टि दिव्यांग बच्चों को सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन विज्ञान अध्यापक राकेश ने किया। समारोह में वाइस प्रिंसिपल अमित शर्मा, अध्यापक हरीश पंवार, शशी, देवीलाल, नरेश नयाल, बैकुंठ वाजपेई, योगेश अग्रवाल, योगेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
पैदल यात्रा कर जगा रहे बाल कल्याण की अलख
देशभर में बाल मजदूरी व भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या में वृद्धि को रोकने के लिए पिथौरागढ़ के गांव टाणा के रहने वाले अजय मुहिम चला रहे हैं। अजय ने अपने इवेंट मैनेजमेंट के बिजनेस को छोड़कर बाल मजदूरी व बच्चों को भीख देने से रोकने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए उन्होंने पिछले करीब चार साल में एक संस्था बनाकर न केवल साढ़े 14 हजार 800 बच्चों को शिक्षित किया है, बल्कि उन्हें कौशल विकास से भी जोड़ा है। अब तक वह 84 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर लोगों को बाल मजदूरी रोकने व बच्चों को भीख न देने के लिए जागरूक कर रहे हैं। पैदल यात्रा कर अजय शुक्रवार को देहरादून पहुंचे हैं।
अजय ने बताया कि वह 2015 में लखनऊ में शोध कर रहे थे। उस समय एक गांव में कुछ महिलाओं व बच्चों को खुले में शौच के लिए जाते हुए देखा। उस दौरान एहसास हुआ कि वहां कितनी गरीबी है। यहां उन्होंने अपने पैसे से एक सुलभ शौचालय बनवाया। बच्चों को गरीबी के कारण ही मजदूरी और भीख मांगनी पड़ती है। इसी के बाद उन्होंने बाल मजदूरी रोकने के लिए उसने घनश्याम वेलफेयर सोसायटी के नाम से एक संस्था बनाई। संस्था के तीन सेंटर उत्तराखंड व एक लखनऊ में है। पिछले तीन साल में इन सेंटरों पर साढ़े 13 हजार बच्चों को शिक्षित करने के साथ कौशल विकास से जोड़ा जा चुका है।
इस सेंटरों पर कौशल विकास पर रोजाना दो घंटे अलग से कक्षाएं लगती हैं। अजय ने बताया कि वह पिछले 29 सितंबर से पैदल यात्रा कर रहे है। वह अब तक 84000 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं जिसमें से 14000 किलो पैदल यात्रा की है बताया कि वह लोगों को बाल मजदूरी व बच्चों को भीख नहीं देने के प्रति जागरूक कर रहे हैं। पिछले तीन साल में वह 7500 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। इसमें 2 लाख 43 हजार लोगों को ठीक ना देने की शपथ दिलाई है साथी 750 जागरूकता प्रोग्राम भी किए हैं। अजय ने बताया कि वह अब तक 14800 बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित कर चुके हैं। वही 2019 में 43 बच्चों को शिक्षा पूरी कराई है।