जबकि, सेवा संबंधी मदों (टैंट, बसों और अन्य वाहनों का किराया, लाउड स्पीकर आदि) पर 18 फीसदी जीएसटी देय है। मुख्य कोषाधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रत्याशियों के लिए कुल खर्च की सीमा जीएसटी समेत 70 लाख रुपये तय की है। आयोग ने प्रचार के लिए 74 मदें तय की हैं। उनमें से कुछ को जीएसटी मुक्त भी रखा है।
सामान्यता जीएसटी दरें औसतन 12 फीसदी मान ली जाए तो एक प्रत्याशी के करीब आठ लाख रुपये जीएसटी के रूप में जमा होंगे। इससे साफ है प्रत्याशियों को इस बार सोच समझकर और सावधानी से खर्च करना होगा। सभी खर्चों का पक्का बिल जमा करना होगा।
इस बार चुनाव आयोग को हिसाब देना किसी भी प्रत्याशी के लिए आसान नहीं होगा। माना जा रहा है कि प्रत्याशियों को इस बार 70 लाख रुपये का हिसाब देने में चार्टेड अकाउंटेंट की मदद लेनी पड़ सकती है।
...तो सभी पिलाएंगे रेस्टोरेंट में चाय
चाय पिलाने पर जीएसटी तय होने से साफ है कि प्रत्याशी को इसका पक्का बिल जमा कराना होगा। जबकि छोटे कारोबारियों, मसलन चाय की ठेलियों और दुकानों आदि पर बिल पक्का नहीं मिल पाएगा। ऐसे में किसी प्रत्याशी को यदि अपने समर्थकों को चाय पिलानी है तो उसे उन्हें ऐसे रेस्टोरेंट में ले जाना होगा जहां से उसे पक्का बिल मिल जाए।
मद दर जीएसटी (अतिरिक्त)
नाश्ता 60 12
चाय 10 12
समोसा 10 12
खाना 100 12
पानी(1ली) 20 18
लाउड स्पीकर 1000 18
(नाश्ता आदि की दर रुपये और लाउड स्पीकर रुपये प्रतिदिन है)