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डाकपत्थर के 120 छात्रों का भविष्य दांव पर

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
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उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में बगैर शिक्षकों के पद सृजित किए स्नातकोत्तर कक्षाओं में वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान एवं अर्थशास्त्र विषय को स्वीकृति दी गई है। इससे इन विषयों में शिक्षकों की तैनाती नहीं होने से 120 छात्रों का भविष्य दांव पर हैं। शिक्षक नहीं होने से कॉलेज में विषय होने के बावजूद नए शिक्षा सत्र से इन विषयों के छात्रों को दूसरे महाविद्यालयों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
नियमानुसार बगैर शिक्षकों के पद सृजित किए किसी विषय को स्वीकृति नहीं दी जाती। लेकिन, यहां पीजी में एक-दो नहीं बल्कि तीन विषय बगैर टीचरों के पद सृजित किए स्वीकृत कर दिए गए हैं। कॉलेज में न तो इन विषयों के शिक्षकों की तबादलों से तैनाती हुई है और न ही प्रमोशन से तैनाती हो पा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लगभग एक साल पहले कॉलेज में स्नातक स्तर पर भूगोल व समाजशास्त्र विषय को स्वीकृति दिए जाने की घोषणा की थी। लेकिन, इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। न ही शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं और न ही विषयों को स्वीकृति दी गई है। ऐसे में पछवादून क्षेत्र के छात्रों को अन्य कॉलेजों का रुख करना पड़ रहा है।
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स्थानांतरित शिक्षकों के पद भी रिक्त
डाकपत्थर महाविद्यालय उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के दावों की पोल खोल रहा है। महाविद्यालय से करीब छह माह पूर्व स्थानांतरित होकर गए अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान, वाणिज्य एवं गणित के शिक्षकों के पद भी रिक्त हैं। उनके स्थान पर महाविद्यालय में नए शिक्षक नहीं आए हैं। इससे महाविद्यालय में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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दो की जगह एक महिला छात्रावास का हुआ निर्माण
महाविद्यालय परिसर में महिला छात्रावास के लिए शासन से दो छात्रावासों का बजट रिलीज किया गया था। लेकिन, दो की बजाए एक छात्रावास ही निर्माण किया गया। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बने इस छात्रावास में छात्राओं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यही वजह है कि छात्रावास में एक भी छात्रा नहीं है।
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2200 छात्रों वाले महाविद्यालय में पीजी के लिए जिन तीन विषयों की स्वीकृति मिली, इन विषयों के लिए शिक्षकों के पदों का सृजन नहीं हुआ है। इससे पीजी में कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। वहीं, परिसर में दो महिला छात्रावास की जगह लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से एक छात्रावास का निर्माण हुआ है। जबकि, शासन से दो महिला छात्रावास का पैसा रिलीज हुआ।
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- डॉ. केएल बिष्ट, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय डाकपत्थर
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बगैर टीचरों के पद सृजित किए पीजी में विषयों की स्वीकृति के मामले को दिखवाया जाएगा। ऐसा हो सकता है कि उस दौरान पदों के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति मिली हो। लेकिन, अब वित्त से स्वीकृति न मिल पा रही हो। रही बात महिला छात्रावासों की तो शुक्रवार को इस फाइल को तलब कर मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- बीसी मलकानी, उच्च शिक्षा निदेशक
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