फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मृत्युंजय मिश्रा की भीतर की खबर- विवादों के मृत्युंजय मिश्रा

विज्ञापन
विज्ञापन
मृत्युंजय मिश्रा की भीतर की खबर
विज्ञापन

---------------------------
विवादों का ‘दूसरा नाम’ मृत्युंजय
या
विवादों के मृत्युंजय मिश्रा
क्रासर
लेक्चरर पद से लेकर कुलसचिव तक का कार्यकाल रहा विवादित
अब आयुर्वेद विवि का कार्यकाल विजिलेंस जांच के दायरे में आया
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
विवादों का ‘दूसरा नाम’ मृत्युंजय मिश्रा है। लेक्चरर पद पर नियुक्ति से लेकर आयुर्वेद विवि में कुलसचिव पद तक तमाम विवादों ने मिश्रा का पीछा नहीं छोड़ा। इन दिनों उनका आयुर्वेद विवि का कार्यकाल विजिलेंस जांच के दायरे में है।
डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने लेक्चरर के तौर पर उत्तराखंड में अपने कॅरियर की शुरुआत की। वहीं से उनके विवादों की शुरुआत हुई। पहला विवाद दो महाविद्यालयों के प्राचार्य का प्रभार के दौरान एक सत्र में दो-दो डिग्री लेने को लेकर पैदा हुआ था। वर्ष 2007 में मृत्युंजय मिश्रा ने उत्तराखंड तकनीकी विवि में कुलसचिव का पदभार संभाला। यहां उन पर 84 लाख रुपये के घोटाले का आरोप लगा। इस दौरान उनका तत्कालीन कुलसचिव से विवाद भी हुआ। मेडिकल प्रवेश परीक्षा यूपीएमटी में रिजल्ट जारी करने के बाद दोबारा रिवाइज करने पर भी वह विवादों में आए थे। वर्ष 2009 में उत्तराखंड तकनीकी विवि में समूह-ग के पदों की भर्ती को लेकर भी उन पर तमाम अनियमितताओं के आरोप लगे। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद विवि में कुलसचिव का पदभार संभाला। यहां भी तत्कालीन कुलपति प्रो. एसपी मिश्र से उनका विवाद हो गया। यहां हुईं नियुक्तियों में भी वह सवालों के घेरे में आए। इसके बाद उन्हें दिल्ली में अपर स्थानिक आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई। वह कार्यकाल भी अब स्टिंग ऑपरेशन के चलते विवादों में आ गया है। कुछ महीने वहां रहने के बाद वह वापस आयुर्वेद विवि में आए तो विवाद शुरू हो गए। इन दिनों मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ विभिन्न मामलों में विजिलेंस जांच चल रही है। आयुर्वेद विवि में मई-2016 में हुए 65 लाख रुपये के फ र्नीचर और चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद-फ रोख्त के मामले में सीजेएम कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन कुलसचिव मिश्रा समेत तीन लोगों पर मुकदमा चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट
कथित मारपीट भी निकली थी झूठी
मई-2014 में लक्ष्मण सिद्ध मंदिर मार्ग पर मृत्युंजय मिश्रा ने अपने साथ हुई कथित मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी कार फूंकने की कोशिश की गई है। पुलिस की जांच पड़ताल में यह मामला पूरी तरह झूठा निकला था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें