फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंद्रमणी बडोनी स्मृति मंच की खबर

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। इंद्रमणी बडोनी केवल एक राजनेता ही नहीं थे, वह एक संस्कृतिकर्मी भी रहे हैं। टिहरी जिले के अखोड़ी गांव में जन्में इंद्रमणी बडोनी के सामाजिक जीवन की शुरूआत संस्कृतिकर्मी के रूप में हुई। उन्होंने वीर भड़ माधो सिंह मलेथा को नृत्य नाटिका के माध्यम से पूरे देश भर में पहचान दी।
विज्ञापन

यह बात इंद्रमणी बडोनी स्मृति मंच के संस्थापक रमेश उनियाल ने कही। इंद्रमणी बडोनी की पुण्यतिथि पर शिक्षांकुर स्कूल में गत दिवस आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणी बडोनी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर उनके सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को संग्रहित करते हुए वेबसाइट भी लांच की गई। बेवसाइट का शुभारंभ शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने बटन दबाकर की। उन्होंने बडोनी के संस्कृतिकर्म पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के प्रणेता की जयंती 24 दिसंबर पूरे प्रदेश के 36000 स्कूलों में संस्कृति दिवस के रूप में मनाई जाएगी। कार्यक्रम में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी एवं जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने लोक संस्कृति में इंद्रमणी बडोनी के योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इंद्रमणी बडोनी ने गढ़वाल की संस्कृति को पूरे देश के सामने रखने का काम किया। कार्यक्रम में मंच के अध्यक्ष लोका नंद डंगवाल,, सच्चिदानंद जोशी, हरीश जोशी, रचना जोशी ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डा.मुनिराम सकलानी, डिप्टी एसपी रत्न सिंह पंवार, जेपीही बहुगुणा, मेजर प्रेम राम डंगवाल, दर्शन उनियाल,श्रीश डोभाल, युद्धवीर सिंह नेगी, संजय बडोनी, ओम गैरोला आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें