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विधायकी जाती है तो जाए, हम जनता के साथ हैं

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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‘विधायकी जाती है तो जाए, हम जनता के साथ हैं’- हाईकोर्ट के आदेश पर चल रहे अपनी ही सरकार के अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ भाजपा के चार विधायक सोमवार को कुछ ऐसे ही तेवर में नजर आए। इससे बैकफुट पर आई प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाने मौके पर ही नहीं पहुंची। फिलहाल, व्यापारियों की मांग पर प्रशासन ने उन्हें दो दिन के भीतर खुद अतिक्रमण हटाने का मौका दिया है।
सोमवार को टास्क फोर्स को प्रेमनगर बाजार में अतिक्रमण पर कार्रवाई करनी थी, लेकिन सुबह ही व्यापारी नेता राजीव पुंज के नेतृत्व में स्थानीय दुकानदार अभियान के विरोध में धरने पर बैठ गए। सूचना मिलते ही मसूरी विधायक गणेश जोशी, रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, राजपुर रोड विधायक खजानदास और कैंट विधायक हरबंस कपूर भी मौके पर पहुंच गए और व्यापारियों से वार्ता की। जिस जमीन पर अतिक्रमण हटाया जाना था, ये पट्टे पूर्ववर्ती सरकारों ने ही दिए थे। विधायक जोशी का कहना था कि लिहाजा अब इन पर अतिक्रमण हटाने के नाम कार्रवाई सही नहीं है। उन्होंने व्यापारियों को आश्वासन देते हुए कहा कि सभी विधायक उनके साथ हैं। अगर इसके लिए हमारी विधायकी चली जाती है तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। विधायक उमेश शर्मा काऊ भी जनता के लिए विधायकी गंवाने को तैयार नजर आए। वे बोले, हम अतिक्रमण के पक्ष में नहीं हैं। बावजूद इसके हमारी पहली जिम्मेदारी जनता के प्रति है। अन्य विधायकों ने भी कहा कि उन्हें विधायक जनता ने बनाया है। लिहाजा जनता के लिए वे हमेशा खड़े मिलेंगे। विधायकों ने कहा कि अधिकारियों को कोई भी कार्रवाई करनी है तो पहले उन्हें बताना होगा। कहा कि सरकार ने इन लोगों को यहां बसाया है, ऐसे में इनका क्या कसूर है? विधायकों ने कहा कि सरकार अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए अतिरिक्त समय मांगने सुप्रीम कोर्ट जा रही है। उम्मीद है कि जनता को राहत मिलेगी। वहीं, विधायकों के तेवर के चलते अतिक्रमण हटाने वाली टीम मौके पर नहीं पहुंची। भाजपाई विधायकों ने प्रेमनगर बाजार के व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात जल्द मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद व्यापारी मान गए और धरना खत्म कर दिया। अलबत्ता, विधायकों के जाने के बाद दुकानदार खुद मजदूर लगाकर अतिक्रमण ध्वस्त कराते दिखे।
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क्या है, मिट्ठी बेहड़ी का मामला
प्रेमनगर बाजार और मिट्ठी बेहड़ी में सैकड़ों लोग अतिक्रमण की जद में है। प्रेमनगर बाजार में टास्क फोर्स ने 155 अतिक्रमण चिह्नित किए थे। जबकि, मिट्ठी बेहड़ी में 350 परिवार भी इसके दायरे में आ रहे हैं। वर्ष 1998 में मिट्ठी बेहड़ी में नसबंदी के एवज में 37 लोगों को जमीन के पट्टे आवंटित किए गए थे। पहले सरकार ने यह जमीन सेना को दी थी। बाद में सेना जब जमीन पर कब्जा करने पहुंची तो यहां मकान बने हुए थे। 2012 में कांग्रेस की सरकार आ गई। सरकार से वार्ता के बाद तय हुआ पट्टाधारकों को कोल्हू खेत में जगह दी जाए। उन्हें जमीन दे दी गई, लेकिन बाद में पट्टाधारकों ने कहा कि इस जमीन की वैल्यू मिट्ठी बेहड़ी से कम है। इसी में मामला लटका रहा। इधर, अतिक्रमण अभियान शुरू हो गया।
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प्रेमनगर बाजार के व्यापारियों के अनुरोध पर सोमवार को यहां अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं की गई। व्यापारियों ने दो दिन के भीतर खुद अतिक्रमण हटाने की बात कही है। अगर दो दिन में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो टास्क फोर्स की टीम मौके पर जाकर अतिक्रमण ध्वस्त करेगी।
-एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी
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