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पहाड़ की समस्याओं का समाधान गैरसैंण

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ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
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पहाड़ की समस्याओं का समाधान गैरसैंण स्थाई राजधानी है। यह कहना है गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान एवं आंदोलन से जुड़े संगठनों का। प्रेस क्लब में बृहस्पितवार को मीडिया से वार्ता के दौरान संगठन के वक्ताओं ने कहा कि गैरसैंण राजधानी के लिए 17 फरवरी को शाम पांच बजे गांधी पार्क से शहीद स्मारक तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
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उत्तरांचल प्रेस क्लब में बृहस्पितवार को मीडिया से वार्ता के दौरान विभिन्न संगठनों ने गैरसैंण राजधानी के लिए एकजुट प्रयास पर जोर दिया। निर्णय लिया गया कि गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के बैनर तले मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद भी यदि गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित न किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करे। कौशिक समिति और दीक्षित आयोग भी गैरसैंण के पक्ष में अपनी संस्तुति दे चुके हैं। पहाड़ की राजधानी पहाड़ में न होने से पलायन बढ़ा है। बीते 17 वर्षों में 17 लाख से अधिक लोग सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर मैदान एवं अन्य प्रदेशों में पलायन कर चुके हैं। उत्तराखंड की सीमाएं चीन से लगी हुई हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है कि गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित किया जाए। मीडिया से वार्ता में हिल डेवलपमेंट मिशन के अध्यक्ष रघुवीर बिष्ट, ट्रेड यूनियन नेता जगमोहन मेहंदीरत्ता, अखिल गढ़वाल महासभा के सचिव राजेंद्र कोटनाला, अलकनंदा पिंडर घाटी समिति के महेंद्र रावल, पूर्व सैनिक, अर्द्धसैनिक संगठन के महासचिव पीसी थपलियाल, आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, पर्वतीय विकास मंच के अध्यक्ष विजय बौड़ाई, कुर्मांचल विकास परिषद के सचिव ललित जोशी सहित विभिन्न संगठनों के लोग शामिल रहे।
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