ब्यूरो/अमर उजाला , देहरादून।
उत्तराखंड परिवहन निगम के संविदा एवं विशेष श्रेणी कर्मियों का न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये करने समेत तीन सूत्री मांग को लेकर रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् के चार जनवरी को सचिवालय कूच आह्वान और चक्काजाम के एलान से प्रबंधन की नींद उड़ी है। प्रबंधन की ओर से परिषद् पदाधिकारियों को रोजाना वार्ता के लिए बुलाया जा रहा है। सोमवार को भी परिषद् का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए बुलाया गया। कोई नतीजा नहीं निकलने पर मंगलवार को फिर से वार्ता को बुलाया गया है।
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलित हैं। पहली मांग संविदा एवं विशेष श्रेणी कर्मियों का वेतनमान है। पूरा आंदोलन इसी मांग पर टिक गया है। रोडवेज प्रबंधन की ओर से परिषद् के पदाधिकारियों को वार्ता दर वार्ता पर बुलाया जा रहा है। सोमवार को परिषद् अध्यक्ष महेंद्र सिंह जीना और महामंत्री राम चंद्र रतूड़ी के नेतृत्व में पदाधिकारी महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन से मिले। प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों पर अडिग रहा। वहीं, प्रबंधन ने मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा।
वार्ता विफल होने के बाद परिषद् प्रतिनिधिमंडल वापस लौट आया। महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने बताया कि मंगलवार को प्रबंध निदेशक बीके संत से वार्ता होनी है। इसमें कोई फैसला नहीं होता है तो तीन जनवरी से कुमाऊं क्षेत्र के कर्मचारी देहरादून के लिए रवाना होने शुरू हो जाएंगे। चार जनवरी को सुबह सचिवालय कूच किया जाएगा। इसी दौरान चक्का जाम और कार्य बहिष्कार की घोषणा की जाएगी। सोमवार को प्रतिनिधिमंडल में दिनेश गुसांई, प्रेम सिंह रावत, दिनेश पंत, शिव नारायण तिवारी, विपिन बिजल्वाण, डूंगर सिंह और सूरज भान मौजूद थे।
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प्रभावित होगा बसों का संचालन
चार जनवरी को सचिवालय कूच के दिन रोडवेज की सेवाएं प्रभावित होंगी। प्रदेश भर से चालक एवं परिचालक देहरादून पहुंचेंगे। चक्का जाम एवं कार्य बहिष्कार होने से संचालन की व्यवस्था लड़खड़ा सकती है। प्रबंधन ने इसके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी शुरू कर दी है।