किशनपुर/कोटद्वार। भाबर के कई गांवों के बीच से गुजर रहे तेलीस्रोत गदेरा (बरसाती नाला) इस बरसात में तबाही मचा सकता है। इसकी वजह सिंचाई विभाग की अनियोजित बाढ़ सुरक्षा कार्य और लापरवाह कार्यशैली मानी जा रही है। काश्तकारों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों ने बाढ़ सुरक्षा योजना का क्रियान्वयन मनमाने तरीके से किया है, जिसके चलते कई स्थानों पर केवल एक साइड ही सुरक्षा दीवार बनाकर दूसरी साइड छोड़ दी गई है। जो बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाई गई है उसकी खुदाई का मलबा भी गदेरे में ही छोड़ दिया गया है। इससे गदेरे का तल ऊंचा होने से बाढ़ का पानी खेतों में घुसने और भूकटाव का खतरा पैदा हो गया है।
कोटद्वार भाबर की नदियां हर बरसात में कई हेक्टेयर भूमि लील जाती हैं। मालन, सुखरौ, खोह के साथ ही क्षेत्र के बरसाती गदेरे भी बरसात में उफान पर रहते हैं। भूकटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने इन नदियों और बरसाती गदेरों में बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा। भाबर का तेलीस्रोत गदेरा भी बरसात के दौरान पूरी तरह से उफान पर रहता है। इसकी बाढ़ की चपेट में उदयरामपुर, तेलीबाड़ा, रामदयालपुर, मगनपुर, उत्तरी झंडीचौड़, गंदरियाखाल से लेकर सिगड्डी तक का क्षेत्र आता है। सिंचाई खंड दुगड्डा ने तेलीस्रोत गदेरे पर बाढ़ सुरक्षा इंतजाम करने के लिए करीब 15 करोड़ की योजना भेजी, जिसमें से वित्तीय वर्ष 2016-17 में करीब 3.62 करोड़ रुपये ही आवंटित हो सके। इस पैसे का इस्तेेमाल एक ओर से करने के बजाय हर गांव में कर दिया गया। नतीजतन, कई संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा दीवार नहीं बन सकी, जहां एक ओर बनाई गई है, वहीं दूसरी तरफ छोड़ दिया गया है। इससे इन स्थानों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। काश्तकार दीपक कुमार, रामशरण, राममोहन और विजयपाल का कहना है कि सुरक्षा दीवार की खुदाई का मलबा भी गदेरे में छोड़ने से गदेरे का तल ऊंचा हो गया है, जो इस बरसात में तबाही का कारण बन सकता है।
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सुरक्षा दीवार के लिए की गई खुदाई का मलबा गदेरे से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील स्थानों को भी सुरक्षा दीवार से कवर किया जाएगा। -कमल सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड दुगड्डा