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संचालन की राह ताक रही खेल अकादमी

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नई टिहरी। 13 करोड़ की लागत से कोटी कालोनी में बनी राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी संचालन के नाम पर पर्यटन विभाग के अधिकारी तीन साल से सिर्फ कागजों में खेल रहे हैं। अकादमी का ढांचा क्या होगा, एफिलिएशन कैसे मिलेगा, कोर्सों का निर्धारण और संचालन कैसे होगा। इसके लिए जिम्मेदार महकमा कोई प्लान नहीं बना रहा है।
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42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी बांध की झील में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए समय-समय पर राजनेता बड़े-बड़े दावे करते रहे हैं, लेकिन जल क्रीड़ा और अन्य गतिविधियों की दृष्टि से यह झील क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप बनी हुई है। वर्ष 2013 में कोटीकालोनी में 13 करोड़ 62 लाख 42 हजार की लागत से राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी का निर्माण शुरू हुआ था। मार्च 2015 में निर्माण भी पूरा हो चुका है। नवंबर 2015 में अकादमी का लोकार्पण भी हो चुका है, लेकिन संचालन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। पर्यटन परिषद ने संचालन के लिए शासन को निदेशक, प्रशिक्षक सहित अन्य स्टाफ समेत पहले चरण में 22 पदों की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। एफिलिएशन के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, श्रीदेव सुमन विवि और एडवेंचर अकादमी गोवा से संपर्क साधा गया था, लेकिन बाद में पर्यटन विभाग ने स्वयं संचालन का निर्णय बदलते हुए इसका संचालन पीपीपी मोड पर करवाने का फैसला लिया। वर्तमान में स्थित यह है कि पीपीपी मोड पर कोई भी पार्टर नहीं मिल पा रहा है।
अकादमी में इस तरह के कोर्स है प्रस्तावित
1-एरो एडवेंचर सेंटर में पैराग्लाडिंग, पैरासिलिंग, बॉडी सरफिंग, हाट एयर ब्लून।
2-लैंड एडवेंचर सेंटर में रॉक क्लामिंग, रैफलिंग, रिवर क्रासिंग, फ्लाईंग फॉक्स, जौमरिंग, स्नो स्कीईंग, हाइकिंग।
3-वाटर एडवेंटर में कयाकिंग, कनोईंग, रिवर राफ्टिंग, वाटर स्किंग।
प्रोपेशनल कोर्स
ओबीएम मैनटेंशन, एफआरपी बोट रिपेयर, टिलर पावर बोट हैडिंग, रिमोट कंट्रोल्ड पावर बोट हैडिंग, लाइफ सेविंग टेक्नीक्यूज फार वाटर स्पोर्ट्स आपरेटर।
मैनेजमेंट कोर्स
वाटर स्पोर्ट्स सेंटर मैनेजमेंट, वाटर प्रोग्रामिंग फार एक्यूकेटिव, कम्युनिकेशन स्किलस फार वाटर स्पोर्ट्स।

कोट
शासन स्तर पर राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी को पीपीपी मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया गया था, जिसके लिए टेंडर भी हुआ है। लेकिन टेंडर में किसी भी कंपनी का सलेक्शन नहीं हो पाया है। शासन स्तर से अब दोबारा टेंडर की प्रक्रिया होनी है।
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-सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी।
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