खेती में तकनीक के इस्तेमाल से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। कृषि के विविधीकरण के तहत तकनीक के अधिकाधिक इस्तेमाल पर जोर देना होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। शुक्रवार को उत्तरांचल पीजी कॉलेज ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल में हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने यह बात कही। उन्होंने कृषि विविधीकरण के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।
शुक्रवार को ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में कृषि विविधीकरण’ विषय पर उत्तरांचल पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट, कॉलेज के प्रबंध निदेशक जीडीएस वार्ने, अधिशासी निदेशक तवलीन कौर वार्ने, आरसी श्रीवास्तव और डॉ. एस फारूख ने किया। इसके बाद विभिन्न शोध पत्रों की पत्रिका का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने कृषि विविधीकरण की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए इसके विभिन्न उपयोगों की जानकारी दी। प्रो. सुखपाल सिंह ने कहा कि कृषि का भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि विविधीकरण ही नहीं बल्कि इससे प्राप्त फसलों का भी विविधीकरण करना जरूरी है। डॉ. अवधेश कुमार कौशल ने अपने दक्षिण एवं पश्चिमी पंजाब में किए गए शोध कार्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि भूमि की परत का अध्ययन करना विविधीकरण के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक है। कॉलेज के प्रबंध निदेशक जीडीएस वार्ने ने कहा कि अगर आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाए तो कृषि अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत अंग होगा।
इस मौके पर उप निदेशक डीके गुप्ता, प्रिंसिपल डॉ. रश्मि ढींगरा, डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा, डॉ. पल्लवी चौहान, डॉ. नेहा सैनी, डॉ. दीपक कुमार वर्मा, डॉ. यशवंत रावत, डॉ. संदीप ध्यानी, डॉ. सीपी सिंह, डॉ. दयाल सिंह, डॉ. अनिल बिष्ट, डॉ. अभिषेक गौड़ आदि मौजूद रहे।