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जीएसटी की तर्ज पर आनलाइन मिले बिजली कनेक्शन

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जीएसटी की तर्ज पर आनलाइन मिले बिजली कनेक्शन
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार ने मंगलवार को जन सुनवाई की, जिसमें उद्यमियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि नई फैक्ट्री का कनेक्शन लेते समय ली जाने वाली 10000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही उपभोक्ताओं ने जीएसटी की तर्ज पर आनलाइन बिजली कनेक्शन देने की मांग उठाई है।
आयोग में जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने आयोग अध्यक्ष के सामने बिजली कनेक्शन मिलने में आ रही आ परेशानियों समेत कई मुद्दे उठाए। उत्तराखंड इंडस्ट्री वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मारवाह ने उद्योगों को नए बिजली कनेक्शन देते समय 10000 रुपये की प्र्रोसेसिंग फीस को माफ करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जीएसटी की तर्ज पर बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया आनलाइन की जाए ताकि तमाम झंझटों से मुक्ति मिल सके। आवेदन करते समय दस्तावेजों की हार्ड कापी की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। कनेक्शन देने में एसडीओ व अवर अभियंताओं की दखलंदाजी को कम किया जाए। इसके अलावा कनेक्शन देने की समय सीमा को कम किया जाए और जिस दिन बिल बनाया जाए उसके तीन दिन के भीतर बिल उपभोक्ता को मुहैया कराया जाए।
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उद्यमी पंकज गुप्ता ने मुद्दा उठाया कि यूपीसीएल से सुरक्षा प्रतिपूर्ति का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के बजाए भुगतान के अन्य माध्यमों से कराया जाए। दिवस जोशी ने कनेक्टेड लोड, अधिकतम मांग, भार में कमी, मीटर एवं मीटर टेस्टिंग जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कमलदीप कांबोज ने कहा कि बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाया जाए ताकि उपभोक्ताआें को सहूलियतें हो। इसके अलावा उन्होंने यूपीसीएल की ओर नए बिजली कनेक्शन देते समय प्रावधानों के तहत निर्धारित सामान मुहैया नहीं कराने की बात कही। वीरू बिष्ट ने कहा कि कनेक्शन देते समय उपयोग होने वाले सामानाें का पूर्ण विवरण आकलन में नहीं शामिल किया जाता है। साथ ही बिलिंग व्यवस्था में और अधिक सुधार लाने की बात कही। साथ ही सुझाव दिया कि अस्थायी बिजली कनेक्शन देते समय मीटर की अनिवार्यता लागू की जाए। इस पर आयोग अध्यक्ष ने मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। सुनवाई के दौरान सचिव नीरज सती, निदेशक प्रभात डिमरी, निदेशक रजनीश माथुर, उपनिदेशक यशवर्धन डिमरी समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
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