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150 भट्ठा मालिकों से नौ साल की रायल्टी वसूलने के आदेश

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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हाईकोर्ट की ओर से 21 मार्च 2018 को जारी आदेश के बाद उद्यम विकास सचिव आनंदवर्धन ने हरिद्वार जिले के 150 से अधिक ईंट भट्ठा संचालकों पर वर्ष 2009 से बकाया चल रही लाखों रुपये की रायल्टी वसूलने के लिए जिलाधिकारी को दिशा निर्देश दिए। अब प्रशासन नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। इसकी भनक लगते ही ईंट-भट्ठा मालिकों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मुलाकात की और पूर्व में निर्धारित रायल्टी का 50 प्रतिशत जमा कराकर आगे के लिए रायल्टी निर्धारित करने की मांग की। उसके बाद जेएम ने रायल्टी तय कराने का भरोसा दिया है।
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गौरतलब है कि जिले में 150 से अधिक ईंट-भट्ठे हैं। वर्ष 2009 में शासन की ओर से इनकी रायल्टी 36 हजार से बढ़ाकर 72 हजार रुपये सालाना कर दी थी। इस पर ईंट भट्ठा स्वामियों ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। जिसके चलते रायल्टी का मामला अधर में लटक गया था और वर्ष 2009 के बाद से मालिकों ने रायल्टी जमा ही नहीं कराई। इसी बीच आठ दिसंबर-2016 को शासन की ओर से अधिसूचना जारी की गई। इसमें करीब 20 लाख ईंट प्रतिवर्ष उत्पादित करने वाले ईंट भट्ठों से 100 रुपये प्रति हजार के हिसाब से सालाना रायल्टी वसूलने की व्यवस्था की थी, लेकिन क्षेत्र में कई भट्ठे ऐसे हैं जो 20 लाख से भी ज्यादा ईंटों का उत्पादन करते हैं। ऐसे में वर्ष 2016 में जारी अधिसूचना के अनुसार इन प्रत्येक ईंट भट्ठों पर वर्ष 2009 से लेकर अब तक करीब 30 लाख रुपये रायल्टी बकाया होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ष 2016 में इस अधिसूचना के जारी होने के बाद भी ईंट भट्ठों मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि 21 मार्च 2018 को हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों के बाद उद्यम विकास सचिव की ओर से वर्ष 2016 की अधिसूचना के हिसाब से रायल्टी वसूलने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि हाईकोर्ट ने सचिव को रायल्टी में छूट देने का भी अधिकार दिया है, लेकिन यह छूट 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। मंगलवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मिलने पहुंचे ईंट निर्माता कल्याण समिति जनपद हरिद्वार के अध्यक्ष नरेश त्यागी, सचिव विपिन कुमार, कोषाध्यक्ष सुभाष सिंधल आदि ने बताया कि ईंट भट्ठों पर कंपाउंडिंग व्यवस्था के तहत 2016 में दो लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित किए गए थे। जबकि पूर्व में ईट भट्ठों द्वारा 36 हजार रुपये सालाना रायल्टी ली जा रही थी। जिसे बाद में बढ़ाकर 72 हजार कर दी गई। बैठक के दौरान ईंट भट्ठा स्वामियों ने 50 प्रतिशत रायल्टी जमा कराकर आगे के लिए रायल्टी निर्धारण की मांग की। इस पर जेएम ने उच्चाधिकारियों से वार्ता कर समस्या के समाधान का भरोसा दिया है।
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