ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
बीते दशक में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर वनाधिकारियों ने चिंता जताई है। अधिकारियों ने अन्य राज्यों की तुलना में देवभूमि में वन क्षेत्रों का प्रतिशत कम होने पर भी चिंता जाहिर की है। ये बातें वन विभाग की ओर से बृहस्पतिवार से शुरू हुए दो दिवसीय कंजरवेटर्स कान्क्लेव में निकल कर आईं।
कंजरवेटर्स कॉन्क्लेव में वन विभाग के वित्तीय प्रबंधन एवं नियोजन, वर्षा जल संरक्षण, मानव वन्यजीव संघर्ष, जंगलों में लगने वाली आग रोकने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। कॉन्क्लेव के दौरान साल जंगलों में लगी आग की घटनाओं की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जाहिर की गई। इस दौरान एंटी पोचिंग सेल के गठन, कैंपा योजना के तहत जारी किए गए बजट की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा ई-वॉच योजना, जायका परियोजना, नमामि गंगे परियोजना, ग्रीन इंडिया मिशन, पौधरोपण समेत विभिन्न योजनाओं पर चर्चा की गई। साथ ही वन विभाग में कार्यरत संविदा, ऑउटसोर्स, दैनिक श्रमिकों की समस्याओं पर भी मंथन किया जाएगा। कॉन्क्लेव के दौरान दिल्ली की तर्ज पर देवभूमि में बंदरबाड़े बनाने, विभागीय गाड़ियों की मितव्ययता पर अंकुश लगाने व वन भूमि से कब्जे हटाने का निर्णय लिया गया। कॉन्क्लेव में प्रमुख वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष जयराज के अलावा एपीसीसीएफ डीजेके शर्मा, एपीसीएफ मनोज चंद्रन, सीसीएफ रंजना काला, सीसीएफ बीपी गुप्ता, पीसीसीएफ राजीव भरतरी, सीसीएफ आरके मिश्र, मुख्य परियोजना निदेशक जायजा अनूप मलिक, सीसीएफ आरएन झा आदि मौजूद रहे।