सरल भाषा और आसान शब्दों में हों कोर्ट के फैसले
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन साहित्यकारों ने विभिन्न मुद्दों पर अपने अनुभव लोगों से साझा किए। पेशे से वकील और साहित्यकार डॉ.सैफ महमूद ने कहा कि कानून और साहित्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले सरल भाषा और आसान शब्दों में होने चाहिए ताकि आम आदमी की भी समझ में आ सकें।
राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआईसी में आयोजित फेस्टिवल के दूसरे दिन अलग-अलग सत्र में साहित्यकारों ने व्याख्यान दिया। थर्ड जेंडर और होमो सैक्सुअल विषय पर प्रसिद्ध साहित्यकार देवदत्त पटनायक ने कहा कि शास्त्रों में भी तीन लिंग वर्णित हैं। पुलिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसक लिंग। हम लोग इसको स्वीकार नहीं कर पाते हैं। पेड़ों में भी दो लिंगों की खासियत पाई जाती है। यह प्रकृति की सच्चाई है जिसे सभी को स्वीकार करना चाहिए।
इसके बाद इतिहास का पर्यावरण पर असर विषय पर लेखिका नंदिता कृष्णा कहती हैं कि हमारे पूर्वज पेड़-पौधों को पूजते थे। इनके महत्व को देखते हुए इनको पूजा से जोड़ा गया। हमारा कर्तव्य है कि इनका संरक्षण करें। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण की भी अपील की। इसके बाद लॉ एंड लिटरेचर विषय पर व्याख्यान के दौरान लेखिका पिंकी आनंद ने कहा कि तब तक कोई अच्छा वकील नहीं बन सकता है जब तक वह अच्छा बोल और समझ नहीं सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में वकील और साहित्यकार डॉ. सैफ महमूद ने कहा कि कानून पर उन्होंने कुछ किताबें लिखी हैं लेकिन साहित्य पर उनकी पहली किताब बी लव्ड देलही है। इस दौरान वेल्हम गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने सामाजिक जागरुकता के लिए नुक्कड़ नाटक पेश किया।
इस मौके पर टीसन ऑल्टर, लोकेश ओहरी, मंजरी प्रभु, रोशन दलाल, भाजपा नेता मुन्ना चौहान, काजी निजामुद्दीन, सैयद अहमद आदि उपस्थित रहे। वहीं फेस्टिवल के अंतिम दिन शनिवार को प्रसिद्ध साहित्यकार बिलाल सिद्दीकी और सुदीप नागरकर सुबह 10 बजे वक्ता के रूप में शामिल होंगे। दोपहर बाद पुरस्कार वितरण समारोह होगा जिसमें निबंध, कला, नुक्कड़ आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले स्कूली बच्चों को सम्मानित किया जाएगा।