ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड में ग्रीन मिशन लागू हो चुका है, इसके तहत प्रदेश में तेरह सौ हेक्टेयर में प्लांटेशन किया जाएगा। इसके लिए पांच करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं। मंगलवार को मंथन सभागार में वन पंचायत सरपंचों की वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में यह जानकारी प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने दी।
उन्होंने कहा कि वन पंचायत भूमि पर अतिक्रमण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह के जहां कही भी प्रकरण सामने आते हैं। वन पंचायत सरपंच इसके खिलाफ आगे आएं। वन विभाग की ओर से उनका पूरा सहयोग किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अपनी वन पंचायत भूमि की फिर से नपाई कराई जा सकती है। वन पंचायत सरपंचों के वन पंचायत के अलग डिविजन की मांग पर उन्होंने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा। दो महीने के भीतर इस पर कोई निर्णय ले लिया जाएगा।
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि वन पंचायत सरपंच एवं सदस्य वन्य जीवों एवं पेड़ पौधे की रक्षा के लिए अपने पन की भावना से काम करें। अग्नि दुर्घटनाएं न हों इसके लिए आवश्यक कदम उठाएं।
वन पंचायत संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह तोमर ने कहा कि वन पंचायतों का गठन राजस्व विभाग नहीं बल्कि वन विभाग द्वारा किया जाए। वहीं, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में वन पंचायतों को एनजीओ को न दिया जाए। परियोजना निदेशक गढ़वाल एसएम जोशी ने वन पंचायतों के सुदृढ़ीकरण एवं योजनाओं की जानकारी दी। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक वन पंचायत राजीव भरतरी, मुख्य वन संरक्षक इकोटूरिज्म जीएस पांडे, मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय मनोज चंदरन, प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान, गोविंद जोशी, अंकित सिंह, चरण सिंह, कृष्ण जोशी, बालकृष्ण भट्ट, हरीश चंद्र, रमेश दत्त रतूड़ी, पुरुषोत्तम शाह, राजेंद्र बिष्ट, अमित भट्ट आदि मौजूद रहे।