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तीन साल से अटकी प्रक्रिया आगे बढ़ाने को विवि में हड़बड़ी

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की जो नियुक्ति प्रक्रिया विवादों के चलते तीन साल से लटकी है। विवि अब उसे आगे बढ़ाने में बेहद हड़बड़ी दिखा रहा है। 11 मार्च को परीक्षा के बाद 12 मार्च को प्रोविजनल रिजल्ट और आंसर-की जारी कर दी। इस पर आपत्ति भी मांग ली, लेकिन शाम तक समय सीमा भी खत्म हो गई। उधर, आयुष मंत्री जांच के तहत इंटरव्यू प्रक्रिया रोकने की बात कह रहे हैं तो विवि प्रशासन ने ऐसी किसी भी रोक से इनकार किया है। फिलहाल विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
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आयुर्वेद विवि में 19 चिकित्साधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा 11 मार्च को हुई थी। परीक्षा में भारतीय आयुर्वेद संस्थान का दस साल पुराना पेपर रिपीट होने पर विवाद गहरा गया। अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई, लेकिन इस बीच ही विवि ने प्रोविजनल रिजल्ट जारी कर दिया। साथ ही आंसर-की भी जारी की। आंसर-की में एक सवाल गलत था। लिहाजा, 100 के बजाए 99 अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। आमतौर पर आंसर-की पर आपत्ति के लिए कम से कम दो से पांच दिन का समय दिया जाता है, लेकिन विवि ने इसमें केवल सुबह से शाम तक का समय दिया। विवाद गहराया तो विवि बैकफुट पर आ गया और मंगलवार को भी दिनभर आपत्तियां मांगी गईं। मंगलवार को ही इसकी समय सीमा खत्म हो गई। अब विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई विवाद नहीं है। विवि के डीन प्रो. आरके मिश्रा का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया अपने निर्धारित समय के हिसाब से चलेगी। दूसरी ओर आयुष मंत्री का कहना है कि मामले में जांच के चलते इंटरव्यू पर रोक लगा दी गई है।
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