ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
कीर्ति चक्र विजेता शहीद कमांडो सुरजन सिंह की वृद्ध मां सुरेशी देवी सरकार की ओर से रायपुर में दी गई जमीन पर कब्जे के लिए भटक रही है। बेटे की शहादत के बाद प्रदेश सरकार ने उन्हें 0.1180 हेक्टेयर जमीन दी थी। लेकिन, अब उस जमीन पर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री अपना हक बता रही है। कई बार सीमांकन होने के बाद भी कब्जा न मिलने पर अब शहीद की मां ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पत्र लिख जमीन दिलाने की मांग की है।
सुरेशी देवी के पुत्र एनएसजी में कमांडो थे। अक्षरधाम में शहीद कमांडो को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। वहीं, प्रदेश सरकार ने उन्हें रायपुर में दिसंबर 2016 में 0.1180 हेक्टेयर जमीन दी थी। जमीन उनके नाम दर्ज हो गई है। जिसके बाद उन्होंने जमीन पर पक्का निर्माण शुरू कराया। मकान करीब 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है। वृद्धा ने शहीद पुत्र की जयपुर से संगमरमर की प्रतिमा भी मंगवाई हुई है। पिछले 22 जनवरी को वह इस मकान में रहने लगी। उनका आरोप है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की ओर से जमीन पर अपना कब्जा बताया जा रहा है। बीते दिनों उन्हें जिला प्रशासन की ओर से सूचना दी गई उच्च न्यायालय की ओर से जमीन स्टे ऑर्डर है। जिसके चलते अगली सुनवाई तक यथा स्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया है।
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सीमांकन के बाद भी जमीन पर नहीं मिल रहा हक
शहीद के भाई उत्तम सिंह के मुताबिक राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कई बार जमीन का सीमांकन किया। उनके मुताबिक यह जमीन राजस्व विभाग ने पैमाइश के बाद उन्हें सुपुर्द की थी। लेकिन, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री रायपुर के कुछ कर्मचारियों द्वारा जमीन को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का दावा किया गया है।
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प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर रक्षा मंत्रालय तक को लिखा पत्र
शहीद की मां सुरेशी देवी जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर रक्षा मंत्रालय तक को पत्र लिख चुकी हैं। लेकिन, इसके बावजूद अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। कहती हैं कि थक हारकर उन्हें अब उच्च न्यायालय नैनीताल के न्यायाधीश को पत्र लिखना पड़ा है। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।
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इन्हें भी भेजी प्रतिलिपि
पीएम नरेंद्र मोदी, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली, रक्षा मंत्री भारत सरकार, राज्यपाल उत्तराखंड, विदेश मंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री उत्तराखंड, सेनाध्यक्ष बिपिन रावत, सांसद पौड़ी, प्रदेश के मुख्य सचिव, डीएम समेत अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायत की प्रति भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
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मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा कुछ है तो मामले को दिखवाया जाएगा। इसके बाद जो भी कुछ सामने आएगा, उस हिसाब कार्रवाई की जाएगी।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी
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