ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
प्रदेश में पहली बार आयोजित किए जा रहे खेल महाकुंभ की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं बुधवार से शुरू हो गई। तपोवन स्थित मैदान में खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस दौरान अव्यवस्थाएं हावी रही और खिलाड़ियों को परेशानी झेलनी पड़ी। खिलाड़ियों को कंकड़ों से भरे मैदान में कबड्डी और खो-खो के मुकाबले खेलने पड़े।
बुधवार को पीआरडी मैदान में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरविंद पांडेय ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। 100 मी दौड़ में नैनीताल के जसराज पहले, यूएसएन के मनसुख सिंह दूसरे व पिथौरागढ़ के दीपांशु कुमार तीसरे और 600 मी दौड़ में नैनीताल के नीरज नगरकोटी पहले, अल्मोड़ा के करण सिंह दूसरे व दून के प्रवीन कुमार तीसरे स्थान पर रहे। कबड्डी प्रतियोगिता में उत्तरकाशी ने नैनीताल को 37-16, टिहरी ने चमोली को 30-23, हरिद्वार ने रुद्रप्रयाग को 27-10, पौड़ी ने चंपावत को 29-05 से हराया। क्वार्टर फाइनल में बागेश्वर को 24-15 से हराकर टिहरी की टीम सेमीफाइनल में पहुंची।
खो-खो प्रतियोगिता में बागेश्वर ने उत्तरकाशी, हरिद्वार ने अल्मोड़ा और देहरादून ने चमोली को शिकस्त दी। जूडो 25 किग्रा भार वर्ग में दून के वंश थापा पहले, नैनीताल के निजल बोरा दूसरे व पिथौरागढ़ के आलोक चंद तीसरे, 30 किग्रा भार वर्ग में दून के अभिनव शर्मा पहले, पिथौरागढ़ के सुमित उप्रेती दूसरे व नैनीताल के शुभम पांडेय तीसरे, 35 किग्रा भार वर्ग में दून के प्रमोद बिष्ट पहले, पिथौरागढ़ के आयुष कुमार दूसरे, 40 किग्रा भार वर्ग में दून के आयुष नेगी पहले, पिथौरागढ़ के कार्तिकेय बिष्ट दूसरे व हरिद्वार के अमन धीमान व नैनीताल के रोहित तीसरे स्थान पर रहे।
टेबल टेनिस में ऊधमसिंह नगर ने बागेश्वर को 3-0 और देहरादून ने हरिद्वार को 3-0 से हराया। वालीबाल में टिहरी ने बागेश्वर को 23-3 व 25-4, चंपावत ने उत्तरकाशी को 25-24 व 35-32 और चमोली ने यूएसएन को 25-11 व 25-16 शिकस्त दी। इस अवसर पर विधायक खजान दास, सचिव डा. भूपिंदर कौर औलख, निदेशक प्रशांत आर्य, आरसी डिमरी, अजय अग्रवाल, शक्ति सिंह, रविंद्र रावत समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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अव्यवस्थाओं से खिलाड़ी परेशान
आयोजन में अव्यवस्थाओं के चलते खिलाड़ियों को परेशानी झेलनी पड़ी। कबड्डी और खो-खो प्रतियोगिता कंकड़ों वाले मैदान में हुई। उद्घाटन के लिए खिलाड़ियों को करीब डेढ़ घंटे खेल मंत्री का इंतजार करना पड़ा। आयोजकों के बीच सामंजस्य न होने के चलते काफी देर तक प्रतियोगिताएं शुरू नहीं हो सकी। परेशान खिलाड़ी इधर-उधर भटकते रहे।