42000 करोड़ की स्टेट नीड ग्रांट चाहता है राज्य
उत्तराखंड सरकार राज्य की आवश्यकताओं पर आधारित अनुदान के एवज में वित्त आयोग से करीब 42000 करोड़ की स्टेट नीड ग्रांट चाहती है। इसके पक्ष में जो तर्क गढ़े हैं उनमें राज्य का वनाच्छादित दायरा मुख्य है। इसके एवज में तय होने वाला अनुदान 20 प्रतिशत किए जाने की सरकार ने पैरवी की है।
इस वन आवरण के संरक्षण, इससे कार्बन क्रेडिट के तौर पर देश को सालाना मिल रही 92 हजार करोड़ की पर्यावरणीय सेवा व पर्यावरणीय बंदिशों से थमी बिजली परियोजनाओं के बदले वित्तीय अनुदान का अनुरोध दरअसल, राज्य की आवश्यकता के ही तत्व हैं। इनके अलावा आपदा के मानकों में वनाग्नि, हिमस्खलन, भू-धंसाव को भी जगह दिए जाने की वकालत भी सरकार विशेष अनुदान की चाहत के लिए ही की है।
15वें वित्त आयोग ने क्या तय किया
| मद |
तय आवंटन(करोड़ में) |
| केंद्रीय करों में हिस्सेदारी |
47,234 |
| राजस्व घाटा अनुदान |
28147 |
| त्रिस्तरीय पंचायतों व शहरी निकायों के लिए |
3384 |
| आपदा |
5752 |
| स्थानीय निकायों के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुदान |
7797 |
कुल - 85,314
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16वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य सरकार की ओर से जो प्रस्तुतिकरण दिया गया, उसमें स्टेट नीड ग्रांट का विषय रखा गया। हम चाहते हैं कि आयोग हमारे इस विषय पर गंभीरता से विचार करे। इसके पक्ष में हमने तर्कसंगत तथ्य रखे हैं। आयोग ने हमारी बातों को गंभीरता सुना है। मेमोरेंडम के अलावा हम स्टेट नीड ग्रांट के विषय में आयोग को अलग से एक और पेपर सौंपेंगे। -दिलीप जावलकर, सचिव वित्त