ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
सुमित्रानंदन पंत छायावाद के श्रेष्ठ शिल्पी थे। पंत ने गद्य और पद्य दोनों ही विधाओं में लिखा था। उनके साहित्य में प्रकृति और छायावाद का सुंदर चित्रण किया है।
ये बातें लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सूर्य प्रकाश दीक्षित ने रविवार को सुमित्रानंदन पंत की जयंती के अवसर पर कहीं। डॉ. दीक्षित रविवार को हिंदी साहित्य समिति की ओर से परेड ग्राउड स्थित हिन्दी भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर डॉ. दीक्षित को सुमित्रानंदन पंत स्मृति साहित्य साधक सम्मान भी दिया गया। डॉ. दीक्षित ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत ने 14 वर्ष की आयु से लिखना शुरू कर दिया था और लगभग 60 वर्ष तक लिखते रहे। उन्होंने हर विधा पर लिखा और साहित्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष रामवीर सिंह एवं महामंत्री हेमंत नंदन कुकरेती ने कहा कि हिंदी साहित्य समिति का उद्देश्य साहित्यिक गतिविधियों को प्राथमिकता देना है। इसके अलावा उत्तराखंड के कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती के जरिये भविष्य में साहित्यिक कार्यक्रमों का आदान-प्रदान करते रहेंगे। इस अवसर पर इंद्र देव रतूड़ी, राकेश, शादाब असी, सोम प्रकाश शर्मा, टीके अग्रवाल, एससी भटनागर, पीयूष भटनागर, नेमचंद्र जैन, निशा रस्तोगी, शिव प्रसाद मोहन आदि मौजूद रहे।