ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
अमान्य डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करने में हरिद्वार के एक और शिक्षक का नाम सामने आया है। शिक्षक ने इंटरमीडिएट किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से करने के बजाय वर्ष 1999 में हिंदी साहित्य सम्मेलन से मध्यमा विशारद किया था। यह प्रमाणपत्र उत्तराखंड में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं है। इसी प्रमाणपत्र को आधार बनाकर वह साल 2001 में शिक्षामित्र बन गया और वर्ष 2015 में उसे सहायक शिक्षक बना दिया गया।
शिक्षक वर्तमान में राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलेलपुर, खंड रुड़की हरिद्वार में बतौर सहायक शिक्षक तैनात है। मामले की जांच कर रही एसआईटी ने शिक्षक के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। इसके अलावा तत्कालीन नियुक्ति अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को शिक्षा निदेशालय को लिखा है।
एसआईटी की जांच में अब तक सैकड़ों शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने फर्जी और अमान्य शैक्षिक प्रमाणपत्रों के माध्यम से नौकरी हासिल की है। अब हरिद्वार जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलेलपुर में तैनात सहायक शिक्षक अमर सिंह का नाम सामने आया है। एसआईटी प्रभारी श्वेता चौबे ने बताया कि अमर सिंह साल 2001 में बतौर शिक्षामित्र भर्ती हुआ था। इसके लिए उसने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से इंटरमीडिएट नहीं किया, बल्कि हिंदी साहित्य सम्मेलन से मध्यमा विशारद का प्रमाणपत्र हासिल किया था। इसके बाद उसने पत्राचार से बीए और फिर बीटीसी की परीक्षा पास की। साल 2015 में जब शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के पद पर समायोजित किया गया तो उसमें अमर सिंह का नंबर भी आया। इस पर उसे बलेलपुर विद्यालय में नियुक्ति मिल गई। श्वेता चौबे ने बताया कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को किसी भी प्रकार की मान्यता नहीं है। लिहाजा उसे न तो शिक्षामित्र की नियुक्ति देने में और न ही फिर समायोजन में नियमों का पालन किया गया। इस आधार पर एसआईटी ने अमर सिंह के साथ-साथ शिक्षा विभाग के तत्कालीन नियुक्ति अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति करते हुए विभाग को लिखा गया है। बता दें कि एसआईटी साल 2012 से 2015 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों की जांच कर रही है। अब तक फर्जी और अमान्य डिग्रियों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले सैकड़ों शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ विभिन्न जनपदों में मुकदमें भी दर्ज हुए हैं।