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गुलदार की तलाश में खुद उतरे पार्क निदेशक

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ब्यूरो/अमर उजाला,रायवाला।
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राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में आदमखोर गुलदार की तलाश में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन की टीमें दिन-रात मुश्तैदी से जुटी हैं। गुलदार की पहचान करने के लिए खुद टाइगर रिजर्व पार्क के निदेशक सनातन सोनकर ने सर्च आपरेशन की कमान संभाली हुई है। सत्यनारायण सेक्शन में सौंग और सुसवा नदियों के बीच वाले गौहरीमाफी वन मोटर मार्ग के दोनों ओर दर्जन भर कैमरा ट्रैप, चार पिंजरे और दो हाथियों की मदद ली जा रही है। करीब दो दर्जन विभागीय कर्मचारी आदमखोर की तलाश में जंगल में तलाशी में जुटे हैं, लेकिन वारदात के करीब दस दिन बाद भी ट्रेंकुलाइज करने की बात तो दूर गुलदार को ट्रेस तक नहीं किया जा सका है।
गौरतलब है कि बीते दिनों गौहरीमाफी वन मोटर मार्ग से जाते हुए एक महिला को आदमखोर गुलदार ने निवाला बना लिया था। घटना के बाद से ही आदमखोर गुलदार की तलाश की जा रही है। निदेशक सनातन सोनकर ने बताया कि सर्च में करीब दो दर्जन कर्मचारियों को लगाया गया है। उनका कहना है कि जंगल में घनी झाड़ियों में गुलदार को ढूंढना और यह पता लगाना कि हमलावर गुलदार कौन है? मुश्किल काम है। बताया कि शाम के समय शुरू किए जा रहे सर्च अभियान में हाथियों से दो टीमें ट्रेंकुलाइज गन के साथ रात के दस बजे तक जंगल में गश्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गुलदार वारदात वाले क्षेत्र में रखे गए करीब चार पिंजरों के आसपास तो आ रहा है, मगर उनमें फंस नहीं पा रहा है।
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जबकि कैमरा ट्रैप में उसे पिंजरों के आस-पास मंडराता हुआ लगातार देखा जा रहा है। बताया कि अब तक चलाए गए अभियान में गौहरीमाफी वन मोटर मार्ग वाले जंगल क्षेत्र में एक नर और एक मादा गुलदार कैमरा ट्रैप में नजर आए हैं, मगर दोनों गुलदार अभी पकड़ से बाहर हैं। रेंज अधिकारी विकास रावत ने बताया कि राजाजी टाइगर रिजर्व के भीतर गुलदारों को पकड़ने के लिए वन्यजीव अधिनियम की सीमा में रहकर अभियान चलाया जा रहा है। गुलदारों की गतिविधियों को देखते हुए आसपास के गांवों में ग्रामीणों को सतर्कता बरतने को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
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समितियों को जारी किया फंड
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर ने बताया कि प्रतीतनगर, गौहरीमाफी, खांडगांव और हरिपुरकलां में गठित इको विकास समितियों के खाते में डेढ़ लाख प्रति समिति धनराशि उपलब्ध कराई गई है। जिसे समिति के प्रस्ताव के आधार पर गुलदार से खतरे वाले स्थानों में पथ प्रकाश आदि व्यवस्थाओं पर खर्च किया जाएगा।
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