ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
वार्षिक स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के अनुपालन में सुगम-दुर्गम के निर्धारण पर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (एफएसओ) का आरोप है कि सुगम-दुर्गम के निर्धारण में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई है। नीति में अभिहित अधिकारियों के लिए जिन स्थानों को दुर्गम बताया गया है कि, उन्हीं स्थानों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए सुगम निर्धारित किया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नेशनल इन्फार्मेशन सेंटर (एनआईसी) की वेबसाइट पर डाली गई सूची के अनुसार, पिथौरागढ़ जैसे दूरस्थ जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के छह पद सृजित हैं, जिनमें से बेरीनाग, डीडीहाट जैसी जगहों को सुगम का दर्जा दिया गया है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जो क्षेत्र दुर्गम हैं, वही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए सुगम बताए गए हैं।
उनका कहना है कि स्थानांतरण नीति में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई है। उधर, संयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त युगल किशोर पंत का कहना है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सुगम-दुर्गम निर्धारण के संबंध में जिला मुख्यालयों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इन्हीं के आधार पर ही सुगम और दुर्गम का का निर्धारण किया गया है। उन्होंने बताया कि स्थानांतरण नीति के अनुसार, हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले को अभिहित अधिकारियों के लिए सुगम माना गया है। शेष नौ जिले दुर्गम की श्रेणी में हैं।