ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी
नगर की प्रमुख समस्याओं से सरकार को रूबरू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने जनप्रतिनिधियों, होटलियर्स, ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्यों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ मसूरी की वहन क्षमता पर विस्तार से चर्चा की। कमेटी ने उनके सुझाव सुने और उन्हें सरकार को सौंपने के लिए आश्वस्त किया।
सोमवार को मॉनिटरिंग कमेटी के सचिव एमसी घिल्डियाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने कहा कि मसूरी से सरकार को प्रति वर्ष 50 करोड़ का राजस्व हासिल होता है। लेकिन सरकार यहां की मूल समस्याओं का निदान नहीं कर पा रही है। उन्होंने मसूरी के निकटवर्ती क्षेत्रों को भी पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने के सुझाव दिए। मसूरी नागरिक समिति के संयोजक प्रदीप भंडारी ने कहा कि एमडीडीए और वन विभाग के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नही है, जो वन और गैर वन भूमि को दर्शाता हो। लिहाजा लोगों को भवन निर्माण के समय मानचित्र स्वीकृत कराने में परेशानी होती है।
ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मॉनिटरिंग कमेटी की ओर से पहले भी वहन क्षमता पर कई बैठकें हुईं और सुझाव मांगे गए, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। नगरवासी तीन दशक से पार्किंग, पेयजल और यातायात की समस्याओं से जूझ रहे हैं। पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने कहा उत्तम प्रबंधन से वर्तमान संसाधनों का दोहन कर समस्याओं को कुछ कम किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आज तक प्रयास नहीं किए गए। बैठक में पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, सभासद जसबीर कौर, सुभाषिनी बर्थवाल, जावेद खान, एएस खुल्लर, संजय अग्रवाल, रामप्रसाद कवि ने भी सुझाव रखे। बैठक में दिनेश चंद्र खंडूरी, ईओ एमएल शाह, डॉ. आरके सिंह, एसडीओ मसूरी वन प्रभाग नीरज शर्मा, एसके सैनी, सभासद रमेश भंडारी मौजूद थे।