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सेना के लड़ाकू और मालवाहक विमान बने कौतूहल

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ब्यूरो/अमर उजाला, डोईवाला/देहरादून
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डोईवाला के आसमान में सेना के दो लड़ाकू विमानों के अचानक मंडराना और जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर शाम को मालवाहक बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग कौतूहल का विषय रही। हालांकि, सेना की इस गतिविधि को चीन सीमा से जुड़े प्रदेश में अभ्यास के तौर पर देखने की चर्चा रही। बताया जा रहा है कि सेना के लड़ाकू विमान गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से यहां आए थे।
बृहस्पतिवार सुबह करीब दस बजे डोईवाला के आसमान में अचानक तेज ध्वनि के साथ दो विमान मंडराने लगे। लोग यह नजारा देखकर हैरान हो गए। यह सेना के लड़ाकू विमान थे। अभी एक विमान हवा में तैर ही रहा था कि दूसरा भी तेज गति से जौलीग्रांट एयरपोर्ट के ऊपर पहुंच गया। काफी देर मंडराने के बाद विमान करीब 10 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लैंड हुए बिना ही लौट गए। विमानों के मंडराने को लेकर दिनभर कौतूहल रहा। तरह-तरह की चर्चाएं भी रहीं। इस बीच, शाम को फिर एक बड़ा विमान आसमान में नजर आया। शाम करीब 7:30 बजे सेना का मालवाहक विमान बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर एयरपोर्ट पर लैंड हुआ।
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इस विमान को देखने के लिए लोग शाम को घर की छतों पर चढ़ गए। विमान एयरपोर्ट के रनवे पर दौड़ते हुए एनटीआरओ पर जाकर रुक गया। बड़े विमान की लैंडिंग के मद्देनजर पहले से ही व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई थीं। पूरा रनवे खाली था। दूसरे विमानों की नियमित आवाजाही को भी बंद किया गया था। चीन सीमा से जुड़े प्रदेश में सेना की इस गतिविधि को सैन्य अभ्यास के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, जौलीग्रांट एयरपोर्ट के निदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि यह सेना की सामान्य एक्सरसाइज है। लड़ाकू विमान हिंडन एयरबेस से आए थे और बिना लैंड हुए ही लौट गए। वहीं, मालवाहक विमान सिरसा एयरबेस से आया।
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70 टन वजन ले जा सकता है ग्लोबमास्टर
सेना का बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर दुनिया के विशाल मालवाहक विमानों में से एक है। यह कारगिल, लद्दाख समेत अन्य उत्तरी और उत्तर पूर्वी सीमाओं पर भी आसानी से लैंड कर सकता है। खास बात यह है कि लैंडिंग में परेशानी होने पर इस विमान को रिवर्स गियर भी दिया जा सकता है। यह विमान एक बार में 70 टन तक वजन अपने साथ ले जा सकता है। इसके अलावा इसमें 150 से ज्यादा सेना के जवान एक बार में जा सकते हैं।
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