कोटद्वार (ब्यूरो)। उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के छात्रसंघ चुनाव समाप्त करने, महाविद्यालय में ड्रेस कोड लागू करने और शुल्क में वृद्धि के बयान से आक्रोशित छात्रों ने उनका पुतला फूंका। उन्होंने महाविद्यालय में एडमिशन फार्म की बिक्री पर रोक लगाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री से उक्त निर्णय को वापस लेने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर महाविद्यालय को बंद कर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
बृहस्पतिवार को छात्र संघ अध्यक्ष देवाशीष रावत के नेतृत्व में छात्र महाविद्यालय में एकत्र हुए। उन्होंने महाविद्यालय के गेट के बाहर उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनका पुतला आग के हवाले किया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि ड्रेस कोड और फीस वृद्धि पर सभी महाविद्यालयों को उनकी भौगोलिक स्थिति और जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा मंत्री का ध्यान महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं के पठन पाठन के लिए लाइब्रेरी, पुस्तकों की व्यवस्था, फर्नीचर की व्यवस्था, प्रवेश के लिए सीटों में बढ़ोतरी और शिक्षकों की व्यवस्था पर जाना चाहिए, लेकिन वह यह सब न कर छात्रों का शोषण करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे किसी भी हाल में पूरा नहीं होने दिया जाएगा।
इस अवसर पर पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सूरज प्रसाद कांती, राजीव पटवाल, नरेश कोटनाला, अतुल डोबरियाल, अश्विन कुकरेती व हिमांशु बहुखंडी आदि मौजूद थे।
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एनएसयूआई ने की महाविद्यालय में तालाबंदी
उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ किया प्रदर्शन, आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
जयहरीखाल। उच्च शिक्षा मंत्री के बयान से नाराज राजकीय महाविद्यालय जयहरीखाल के एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने महाविद्यालय में प्रवेश फार्मों की बिक्री बंद कराते हुए तालाबंदी कर दी। उन्होंने मंत्री पर छात्रों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाते हुए बयान वापस लेने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
बृहस्पतिवार को एनएसयूआई के पदाधिकारी महाविद्यालय में एकत्र हुए। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। आक्रोशित छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रवेश फार्म की बिक्री पर रोक लगा दी। इसके बाद उन्होंने महाविद्यालय में तालाबंदी की और महाविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी दिलवर सिंह नेेगी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने मंत्री के इस बयान को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के विरुद्ध बताया। कहा कि एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में छात्र-छात्राओं से उनके अपने प्रतिनिधि को चुनने के अधिकार (छात्रसंघ चुनाव) का हनन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं पर जबर्दस्ती ड्रेस कोड थोपा जा रहा है। महाविद्यालय में बहुत से छात्र-छात्राएं गरीब परिवारों से हैं, जिनके लिए महाविद्यालय शिक्षण शुल्क भरना भी किसी पहाड़ चढ़ने से कम नहीं होता। इसका सीधा असर निर्धन परिवार के बच्चों पर पड़ेगा। चेताया कि मंत्री द्वारा फैसला जल्द वापस नहीं लिए जाने पर छात्र उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस अवसर पर छात्र नेता अंकित रावत, अमन नैथानी, रोहित कंडवाल व संजय सिंह आदि मौजूद थे।