ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वालीं राज्य आंदोलनकारी शकुंतला मैठाणी का बीते शुक्रवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह कैंसर से पीड़ित थीं। वह 59 साल की थीं। वह अपने पीछे एक बेटे और दो बेटियों को छोड़ गई हैं।
मूल रूप से गिरी गांव मैठाणी पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली शकुंतला मैठाणी ने राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर कांड और देहरादून में राज्य निर्माण के लिए कई लाठी और डंडे खाए। कई दिनों तक वह जेल में भी रहीं। राज्य निर्माण के बाद उन्हें सरकार ने वरियता देते हुए वीर शहीद केसरी चंद राजकीय महाविद्यालय डाकपत्थर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनाती दी थी। उन्होंने कैंसर के इलाज के दौरान देहरादून स्थित अपनी बेटी के घर में अंतिम सांसे ली। उनका हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया गया। क्षेत्र के राज्य आंदोलनकारियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। वहीं, डिग्री कॉलेज प्रशासन ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्राचार्य डॉ. केएल बिष्ट ने कहा कि कॉलेज में सेवाकाल के दौरान उन्होंने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपना कार्य किया। वह पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए आदर्श थीं।
श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ. एएस असवाल, डॉ. राखी डिमरी, डॉ. कामना लोहानी, डॉ. दिप्ती बगवाणी, डॉ. राजकुमारी भंडारी, डॉ. आशाराम बिजल्वाण, बीसी काला, दीपक भट्ट, दीपक बिष्ट शामिल रहे।