ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्याें, शिक्षकों के हुए अनिवार्य तबादलों में खामियां उजागर हो रही हैं। विभाग ने ऐसे शिक्षकों का तबादला सुगम में नहीं किया जो बीते तीन दशक से दुर्गम में सेवाएं रहे हैं। इस मामले में उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने अधिकारियों से वार्ता की रणनीति तय की है।
बता दें, बीते दिनों शिक्षा विभाग में प्राथमिक से लेकर इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों के अनिवार्य तबादले किए गए थे। अनिवार्य तबादलों में नियमों की अनदेखी को लेकर तमाम खामियां भी सामने आ रही हैं। टिहरी जिले के प्रतापनगर ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय भरपूर में तैनात प्रधानाध्यापिका संतोष 1988 से दुर्गम में सेवाएं दे रही हैं। 52 साल उनकी उम्र हो चुकी है, लेकिन तबादला सूची से संतोष का नाम गायब है। प्रधानाध्यापिका संतोष तो एक उदाहरण मात्र हैं। विभाग में तमाम ऐसे शिक्षक है जो लंबे समय से दुर्गम में सेेवाएं दे रहे हैं, लेकिन स्थानांतरण सूची से उनके नाम गायब हैं।
उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान का कहना है कि यह सही है कि अनिवार्य स्थानांतरण सूची में तमाम खामियां हैं। जो एक एक कर उजागर हो रही हैं। स्कूलों के खुलने के बाद इस संबंध में बैठक करने के बाद अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।