ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को दो वर्ष का सेवा विस्तार समाप्त किए जाने के सरकार के निर्णय पर प्रांतीय प्रधानाचार्य परिषद ने कड़ी आपत्ति जताई है। परिषद ने राज्य सरकार पर शिक्षक विरोधी निर्णय लेने का आरोप लगाया है।
प्रांतीय प्रधानाचार्य एसोसिएशन की बैठक शनिवार को गांधी इंटर कॉलेज में प्रांतीय अध्यक्ष प्रकाश चंद्र सुयाल की अध्यक्षता में हुई। सुयाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को दो से बढ़ाकर तीन वर्ष का सेवा विस्तार दिया जा रहा है। दूसरी ओर उत्तराखंड सरकार दो वर्ष के सेवा विस्तार को भी समाप्त करने जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ राजकीय विद्यालयों में ऑउटसोर्स पर चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्तियां की जा रही है। दूसरी ओर पिछले आठ वर्षों से अशासकीय विद्यालयों में इन पदों की भर्ती पर रोक है। कोचिंग के लिए 100 होनहार छात्रों के चयन में भी अशासकीय विद्यालयों को बाहर रखकर भेदभाव किया जा रहा है।
प्रांतीय महामंत्री अवधेश कुमार कौशिक ने सभी जिलों में जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के निर्देश दिए। साथ ही नई शिक्षा नीति के संबंध में भी चर्चा की। इसके अलावा अशासकीय विद्यालयों की व्यवस्था एवं मूल्यांकन पद्धति में सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किए। सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट तैयार करने के लिए प्रदीप डबराल, प्रकाश चंद्र सुयाल, अवधेश कुमार कौशिक, जेपी जगूड़ी और आलोक गोयल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बैठक में प्रदेश महामंत्री डीसी भट्ट, प्रमोद कुमार, रामलखन गैरोला, सुभाष चंद्र भटनागर, एके श्रीवास्तव, श्रवण कुमार, जितेंद्र कुमार, गिरीश चंद्र, अवतार सिंह चावला, शशिधर कुकरेती, अर्चना गोयल, ललित किशोर शर्मा आदि मौजूद रहे।