ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। देश को पहलवान देने में हरियाणा भले ही नंबर एक पर है लेकिन, बच्चे उत्तराखंड के तंदुरुस्त पैदा होते हैं। डील-डौल में पंजाब के लोग कितने ही बड़े क्यों न हों, मगर हस्ट-पुष्ट नवजातों में उत्तराखंड ने बाजी मारी है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में पैदा होने वाले बच्चों का वजन इन दोनों राज्यों में पैदा होने वाले बच्चों से कहीं अधिक होता है। इतना ही नहीं इस मामले में देश के 21 बड़े राज्यों में से 16 प्रदेश उत्तराखंड से पीछे हैं।
दरअसल, जन्म के समय 2500 ग्राम से कम वजन के बच्चे को लो-बर्थ वेट की श्रेणी में गिना जाता है। देशभर के 21 बड़े राज्यों में जब इसका सर्वे हुआ तो उत्तराखंड चौथे नंबर पर आया। यहां मात्र 8.2 फीसदी बच्चे कम वजन के (यानी 2500 ग्राम से कम) पैदा होते हैं। जबकि पंजाब में 8.4 फीसदी और हरियाणा में 8.5 फीसदी बच्चे कम वजन के पैदा होते हैं। इस श्रेणी में सबसे अव्वल जम्मू-कश्मीर है। यहां केवल 5.5 फीसदी बच्चे कम वजन के पैदा होते हैं। जबकि, आखिरी स्थान पर उड़ीसा है। यहां 18.2 फीसदी बच्चे कम वजन के साथ पैदा होते हैं।
दो साल में आई गिरावट
यह श्रेणी भले ही संतोषजनक है, लेकिन दो वर्ष के भीतर इसमें गिरावट भी दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में यहां यह अनुपात 7.3 फीसदी था। जो अब बढ़कर 8.2 फीसदी पहुंच गया है। पंजाब में इससे भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में पंजाब में कम वजन के साथ पैदा होने वाले बच्चों का अनुपात 6.9 फीसदी था। जबकि हरियाणा में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2015-16 में हरियाणा का अनुपात 14.9 था। अब यह अनुपात घटकर 8.5 फीसदी रह गया है।
टीकाकरण में आई गिरावट
नौ से 11 माह के बच्चों के टीकाकरण के मामले में उत्तराखंड में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में जहां 99.3 फीसदी बच्चों का टीकाकरण हुआ था। वहीं वर्ष 2017-19 में 95 फीसदी बच्चों को टीके लगाए गए हैं।