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केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों के होंगे अपने कैंपस

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों का अपने स्थाई कैंपस होंगे। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अस्थाई, वैकल्पिक या किराये के भवनों पर चल रहे संस्थानों की सूची मांगी है।
देश के अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में एनआईटी, आईआईएम, एम्स, जवाहर नवोदय, केंद्रीय विद्यालय समेत अन्य केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान हैं। इनमें से कई संस्थानों के पास अपने स्थाई कैंपस नहीं हैं। इनमें से कुछ अस्थाई या वैकल्पिक परिसरों और किराये के भवनों में चल रहे हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय इन सभी संस्थानों को स्थाई परिसर उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी है। मंत्रालय ने अपने 100 दिन के एजेंडे में इस मुद्दे को प्रमुखता से जगह दी है। इसके तहत अगले पांच वर्षों के दौरान केंद्रीय संस्थानों को स्थाई भवन उपलब्ध कराने पर फोकस किया जाएगा।
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पांच-पांच गांव गोद लेंगे संस्थान
देहरादून। देश के सभी आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत अन्य केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों को आसपास के पांच-पांच गांवों को गोद लेकर उनका विकास करना होगा। एमएचआरडी ने सभी संस्थानों को इसके निर्देश जारी किए हैं। संस्थानों को इन सभी गांवों में सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए रोडमैप तैयार करने और उसके क्रियान्वयन की योजना बनाने को कहा गया है।



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