ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। जिला उपभोक्ता फोरम ने भविष्य निधि संगठन (ईपीएफ) कार्यालय को होटल के कर्मचारी का सात साल का फंड लौटाने के आदेश दिए हैं। ईपीएफ कार्यालय होटल के सत्यापित न होने की बात कहते हुए फंड देने से इनकार कर रहा था। लेकिन, फोरम ने कार्यालय के दावों को खारिज कर फंड की राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार रुपये देने के निर्देश फोरम ने दिए हैं।
विनोद कुमार कन्नौजिया निवासी क्लेमेंटटाउन ने दो माह पूर्व उपभोक्ता फोरम से इस संबंध में शिकायत की थी। इसमें बताया गया था कि वह एक जुलाई-2004 से मसूरी स्थित होटल हैक्मंस ग्रांट में काम करता था। होटल लगातार फंड का पैसा ईपीएफ कार्यालय में जमा करता रहा। 15 फरवरी 2011 को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद होटल बंद हो गया। उसके बाद उसने 24 मार्च 2011 को ईपीएफ के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में फंड निकालने के लिए आवेदन किया। अगले ही दिन फोन पर मैसेज मिला कि विनोद का आवेदन खारिज कर दिया गया है। इसका विनोद ने जब कारण पूछा तो पता चला कि उनका आवेदन होटल द्वारा सत्यापित ही नहीं कराया था। उसके बाद विनोद ने कार्यालय से इस संबंध में सूचनाएं मांगी। साथ ही कई बार गुजारिश भी की, लेकिन कार्यालय बार-बार यही दावा करता रहा। इस मामले में भूपेंद्र कुमार दुग्तल की अध्यक्षता वाली फोरम ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुना। जिसमें ईपीएफ कार्यालय के तर्कों को खारिज कर दिया। जब फर्म बंद हो चुकी है तो इसकी जिम्मेदारी ईपीएफ की होती है कि कर्मचारी का फंड लौटाया जाए। फोरम ने विनोद की नियुक्ति से लेकर होटल बंद होने की तिथि तक फंड का पैसा लौटाने के आदेश दिए।