ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
चकराता। आर्य समाज के दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का समापन मंगलवार को आर्य मंदिर में हवन-पूजन के साथ हुआ। समापन पर वेद ज्ञाताओं ने वेदों में निहित ज्ञान, विज्ञान पर चर्चा की। वेद ज्ञाताओं ने कहा कि चारों वेद अनंत ज्ञान और विज्ञान के भंडार हैं।
मुख्य वक्ता आचार्य आशीष ने कहा कि सृष्टि की रचना से लेकर आज तक वैज्ञानिकों ने जो खोज की है, उनकी वह खोज सदा से वेदों के अनुरूप रही है। सृष्टि में जो हो रहा है वह वेदों के अनुसार है। बताया कि यजुर्वेद के अनुसार पृथ्वी अग्नि और जल से उत्पन्न होती है। सूर्य पृथ्वी का पिता है इसलिए पृथ्वी आकर्षण शक्ति से आकाश में सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में भ्रमण करती है। पृथ्वी के भ्रमण का निमित्त सूर्य है।
बताया कि ऋग्वेद में सूर्य द्वारा वर्षा होना सिद्ध है। ऋग्वेद के अनुसार सूर्य अपनी किरणों से सरोवर आदि का पानी भाप बनाकर ऊपर ले जाता है और वर्षा ऋतु में पृथ्वी पर बरसाता है। इसी प्रकार अथर्ववेद में चिकित्सा विज्ञान आदि का भरपूर ज्ञान दिया है। सामवेद में बताया गया कि परमेश्वर की असंख्य भूमि (लोक) एक साथ घूम रहीं है, जो आपस में टकराती नहीं है। भाव यह है कि अंतरिक्ष में ग्रह घूम रहे हैं, लेकिन आपस में टकराते नहीं है। उन्होंने कहा कि तिनके से लेकर ब्रह्मांड तक का संपूर्ण ज्ञान और विज्ञान का भंडार चारों वेदों में हैं। भजनोपदेशक धर्म सिंह ने भजनों की प्रस्तुति से वेदों की महिमा का वर्णन किया।
इस दौरान आर्य समाज के प्रधान तीर्थ कुकरेजा, प्रेम प्रकाश शर्मा, शत्रुघ्न मौर्य, सुधीर आर्य, पूनम आर्य, धर्मेंद्र सिंह चौहान, कांता कांबोज, केजे चौहान, पंकज त्यागी आदि मौजूद रहे।