दुर्लभ बीमारियों में भी मिला आयुष्मान का ‘कवच’
रुद्रेश कुमार
देहरादून। दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त मरीज भी अब आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज करा सकेंगे। अब तक दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीज) के इलाज का खर्च राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) और हेल्थ मिनिस्टर कैंसर पेशेंट फंड (एचएमसीपीएफ) के अंतर्गत मिलता था। इन निधियों के लाभार्थियों को आयुष्मान का लाभ नहीं दिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इनके लाभार्थियों को भी आयुष्मान योजना में शामिल किया जाएगा।
अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युगल किशोर पंत ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जो लोग राष्ट्रीय आरोग्य निधि और हेल्थ मिनिस्टर कैंसर पेशेंट योजना का लाभ पाते थे, उन्हें अटल आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलता था। जबकि इनके लाभार्थियों में बहुत से लोग रेयर डिसीज यानी दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित हैं। अब ऐसे मरीजों को आयुष्मान का लाभ पाने के लिए यह दर्शाना होगा कि वे इन दोनों निधियों के लाभार्थी हैं या नहीं। इसे उन्हें बाकायदा सत्यापित कराना होगा। इसके साथ ही संबंधित सरकारी अस्पताल से यह भी सत्यापित कराना होगा कि वे दुर्लभ बीमारी से ग्रसित हैं। इसका कारण है कि यह इन निधियों के उन्हीं लाभार्थियों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलेगा, जिन्हें दुर्लभ बीमारी है।
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देश में 450 बीमारियां हैं दुर्लभ
देश में लगभग 450 बीमारियां ऐसी हैं जिन्हें दुर्लभ बीमारियों की श्रेणी में रखा गया है। भारत में लगभग सात करोड़ लोग इन बीमारियों से ग्रसित हैं। जबकि आयुष्मान भारत योजना में इन बीमारियों से अलग कुल 1350 बीमारियों के लिए ही पैकेज शामिल किया गया था। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इन दुर्लभ बीमारियों में से सभी बीमारियां इनमें शामिल होनी है या कुछेक।
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प्रमुख दुर्लभ बीमारियां
- हीमोफिलिया
- थैलिसीमिया
- स्किल सेल एनीमिया
- बच्चों में इम्यूनो की कमी
- लिसोसोमेल स्टोरेज डिसआर्डर
- पोंपे रोग
- हिर्स्बसुंग रोग
- गोचर रोग
- सिस्टिक फाइब्रोसिस व हेमांगीओमास