उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आईआईटी रुड़की के निदेशक और कुलसचिव की ओर से जारी 29 मार्च 2019 के आदेश को भी निरस्त करते हुए मैनेजमेंट स्टडीज विभागाध्यक्ष के पद पर की गई नियुक्ति को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने तीन महीने में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के स्टेटस 22 (1) के तहत दिशा निर्देश तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने पूर्व में सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने मंगलवार को अपना निर्णय सुनाया। मामले के अनुसार डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि आईआईटी रुड़की के निदेशक और कुलसचिव ने 29 मार्च 2019 को आदेश पारित कर उनसे आठ साल कनिष्ठ एसोसिएट प्रोफेसर को मैनेजमेंट स्टडीज विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त कर दिया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सीडी बहुगुणा की ओर से कहा गया था कि निदेशक को विभागाध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार नहीं है। आईआईटी रुड़की के निदेशक और कुलसचिव की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि निदेशक को विशेषाधिकार हासिल है।