ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। एमडीडीए से नक्शा पास कराने के लिए आपको अब दो-दो महीने चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केवल सात दिन के भीतर नक्शा पास हो जाएगा। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने इसके लिए सॉफ्टवेयर अपग्रेड कर दिया है। नई व्यवस्था का ट्रायल 19 जून से शुरू किया जा रहा है।
अब इंजीनियर की बजाय सॉफ्टवेयर के जरिये नक्शों का परीक्षण होगा। बायलॉज के मुताबिक, अगर इसमें कोई गड़बड़ी होगी तो सॉफ्टवेयर तुरंत उसकी जानकारी भवन मालिक और आर्किटेक्ट को भेज देगा। सब ठीक पाए जाने पर नक्शा पास हो जाएगा। एसएमएस और ई-मेल के जरिये आवेदक को इसकी सूचना भी मिल जाएगी। यह सॉफ्टवेयर नक्शा अपलोड करते समय बॉयलाज के अनुसार सारे बिंदुओं की जांच करेगा। इस व्यवस्था से लोगों को काफी राहत मिलेगी।
एमडीडीए में मौजूदा समय में भवन का नक्शा पास कराने में डेढ़ से दो माह का समय लगता है। इसके लिए भवन मालिक बार-बार एमडीडीए के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। इसे देखते हुए एमडीडीए ऑटो कैड (आटोमैटेड डेवलप्ड कंट्रोल रुल्स) सिस्टम को और प्रभावी बनाने जा रहा है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जब आर्किटेक्ट के जरिये अपना नक्शा ऑनलाइन अपलोड करेगा तो उस दौरान लैंडयूज और भवन मालिक का नाम डालना जरूरी होगा। उसके बाद सॉफ्टवेयर, बायलॉज के अनुसार खुद उसका परीक्षण करेगा। नक्शा बायलॉज से इतर होने पर उसकी सूचना एसएमएस और ई-मेल के जरिये तुरंत संबंधित भवन मालिक और आर्किटेक्ट के पास पहुंच जाएगी। जिससे वह समय रहते दुरुस्त करेंगे। सात दिन के भीतर नक्शा पास कर संबंधित व्यक्ति को दे दिया जाएगा।
आर्किटेक्ट की परफॉरमेंस भी होगी चेक
एमडीडीए अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था में आर्किटेक्ट की परफॉरमेंस भी देखी जाएगी। यदि वह बायलॉज के मुताबिक नक्शा नहीं बनाएगा तो नक्शा अपलोड नहीं होगा। इसके चलते आर्किटेक्ट नक्शों में गड़बड़ी नहीं कर पाएगा। इसमें हर कर्मचारी की परफॉरमेंस का इंडेक्स भी होगा। एक आर्किटेक्ट के एक जैसे कितने ऑब्जेक्शन आ रहे हैं। उस पर भी नजर रहेगी। नई व्यवस्था में आर्किटेक्ट के साथ ही एमडीडीए के अधिकारी और कर्मचारी का भी फीडबैक लिया जा सकेगा।
चार-पांच आर्किटेक्ट देखेंगे व्यवस्था
एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था का ट्रायल 19 जून से शुरू किया जाएगा। इसमें कम से कम चार से पांच आर्किटेक्ट इसे देखेंगे। यदि कोई कमी या सुझाव मिलता है तो उस पर अमल किया जाएगा। उसके बाद इस व्यवस्था को इस माह के अंत तक लागू कर दिया जाएगा।
यह होता है ऑटो कैड सिस्टम
ऑटो कैड सिस्टम एक सॉफ्टवेयर है। जिसमें बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक सभी प्रावधान फीड हैं। नक्शा सॉफ्टवेयर में अपलोड करते ही बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार सिस्टम खुद परीक्षण करेगा। उदाहरण के लिए किसी मकान में सेट बैक बायलॉज से कम छोड़ा गया है या एफएआर ज्यादा है या सड़क की चौड़ाई कम है तो नक्शा पेंडिंग होने के साथ ही एसएमएस और मेल से इसकी सूचना तुरंत भवन मालिक को मिल जाएगी।
हमारी प्राथमिकता जनता की सहूलियत है। जिसे देखते हुए तय हुआ कि सात दिन के भीतर लोगों को भवन का नक्शा दे दिया जाए। नए सिस्टम के जरिये कर्मचारी और आर्किटेक्ट सभी की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। - डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, एमडीडीए