अब स्टांप शुल्क में गड़बड़ी नहीं कर सकेंगे विभाग
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्टांप शुल्क वसूलने में सरकार की आंखों में धूल झोंककर राजस्व का चूना लगा रहे रहे विभागों पर शासन ने नकेल कसी है। अब विभागों को लीज, किराए, अनुबंध आदि में अनिवार्य रूप से निर्धारित स्टांप वसूलना होगा। इस संबंध में बुधवार को शासनादेश जारी कर दिया गया है। शासन ने यह आदेश दून में कई विभागों में पकड़ी गईं गड़बड़ियों के बाद जारी किया है। अब इन विभागों से पूरे स्टॉप शुल्क की वसूली की जाएगी।
दरअसल, सरकार को जो राजस्व प्राप्त होता है उनमें स्टांप शुल्क तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा वह स्टांप शुल्क है जो केवल संपत्ति जैसे आवासीय प्लॉट, मकान, दुकान व कृषि भूमि की रजिस्ट्री में वसूला जाता है। इनमें अलावा दूसरे स्रोत लीज, अनुबंध पत्र, बैंक गारंटी, पार्किंग ठेके, लाइसेंस आदि हैं, जिनमें निर्धारित से बेहद कम स्टांप शुल्क वसूला जा रहा था। शासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार यह खुलासा उस वक्त हुआ जब देहरादून के सहायक महानिरीक्षक स्टांप व रजिस्ट्रेशन अरुण प्रताप सिंह ने विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि कई विभागों लाखों के कामों को महज 10 रुपये के स्टांप पर दे दिया। दून में ही आबकारी, खनन और एमडीडीए ऐसे विभाग हैं, जहां बड़े पैमाने पर इस तरह का खेल चल रहा था। आबकारी विभाग ने विदेशी व देसी मदिरा की दुकानों का निर्धारित से बेहद कम स्टांप शुल्क लेकर आवंटन कर डाला।
इस संबंध में बुधवार को वित्त सचिव अमित सिंह नेगी ने शासनादेश जारी कर दिया है। शासनादेश के अनुसार विभागों में जिन कामों में स्टांप जरूरी है, उन्हें अब निर्धारित स्टांप शुल्क वसूलकर ही आवंटित किया जाएगा। शासनादेश के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 17 के अंतर्गत निर्धारित स्टांप शुल्क वसूलना अनिवार्य है। इनमें निकायों द्वारा निर्मित दुकानों की लीज, विभागों की ओर से दिए जाने वाले ठेके, पार्किंग ठेके, लाइसेंस, मदिरा की दुकानों के लाइसेंस सहित अन्य काम शामिल हैं। इसके साथ ही आदेश दिए गए है कि गत वित्तीय वर्ष में की गई कम स्टॉप शुल्क वसूली को विभागों से पूरा वसूला जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागाध्यक्ष अपने जिले के डीएम को अवगत कराएंगे।