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बचाव की मुद्रा में आए वन विभाग के आला अफसर

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बचाव की मुद्रा में आए वन विभाग के आला अफसर
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के जंगलों में वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदाओें को हो रहे भारी नुकसान के बीच वन विभाग के आला अफसर बचाव की मुद्रा में आ गए हैं। प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार वनाग्नि की कम घटनाएं हुई हैं। साथ ही वन संपदाओं को भी कम नुकसान पहुंचा है। पत्रकारवार्ता में आंकडे़ पेश करते हुए प्रमुख वन संरक्षक ने कि पिछले दो जून तक जहां वनाग्नि की 2020 घटनाएं हुईं और 4287.86 हेक्टेयर वन संपदा जलकर राख हो गई और विभाग को 83.21 लाख का नुकसान हुआ। जबकि मौजूदा फायर सीजन में अब तक 1722 घटनाएं हुई हैं और 2362.85 हेक्टेयर वन संपदाओं को नुकसान होने के साथ ही 42 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।
प्रमुख वन संरक्षक ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में 8700 किमी फायर लाइन बनाई गई है। वनाग्नि की तत्काल जानकारी हासिल करने को लेकर निदेशालय में मास्टर कंट्रोल रूम स्थापित करने के साथ ही राज्य में 1557 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। सभी क्रू स्टेशन पर छह से सात कर्मचारियों की तैनाती की गई है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी घटनास्थल पर तत्काल पहुंच सकें, इसके लिए विभागीय वाहनों के साथ ही निजी वाहनों को भी किराए पर लिया गया है। वन क्षेत्राें के बीच 222 वॉच टावरों की भी स्थापना की गई है। वनाग्नि रोकने को लेकर कर्मचारियों की कमी न हो इसके लिए विभागीय कर्मचारियों के अलावा 5212 दैनिक वेतनभोगी फायर वॉचर तैनात किए गए हैं। आग पर तत्काल काबू पाया जा सके, इसके लिए भारतीय वन सर्वेक्षण से सेटेलाइट डाटा भी लिया जा रहा है। वनाग्नि के लिहाज से संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेेत्रों को चिन्हित कर उनकी विशेष निगरानी की जा रही है।
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वनाग्नि को रोकने को लेकर वन पंचायतों की भी मदद ली जा रही है। वन पंचायतों को 2.36 करोड़ का बजट भी मुहैया कराया गया है। इसके अलावा वनाग्नि को काबू पाने में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर बिग्रेड, जिला प्रशासन की भी मदद ला रही है।
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वनाग्नि रोकने को 19.99 करोड़ का बजट जारी
वनाग्नि रोकने को लेकर वन विभाग की ओर से 19.99 करोड़ का बजट प्रभागीय वनाधिकारियों को उपलब्ध कराया गया है।
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वनाग्नि से नुकसान के नए मानक होंगे निर्धारित
प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बताया कि वनाग्नि से वन संपदाओं का नुकसान का आंकलन करने को लेकर नए मानक तय किए गए हैं। वर्तमान में जो मानक हैं वे पुराने हैं और उन पर नए सिरे से मंथन करने की जरूरत है। साथ ही वनाग्नि से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का भी आंकलन कराया जाएगा।
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