ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के पूर्व कर्मियों को समायोजित किया जाना चाहिए। 700 सौ से ज्यादा परिवारों के मामले में डबल इंजन की सरकार को बड़ा दिल दिखाते हुए फैसला लेना चाहिए। यह बात पूर्व कर्मियों के आंदोलन के समर्थन में रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कही।
उन्होंने कहा कि 11 साल की सेवा के बाद 700 से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। यह केवल 700 परिवारों का मामला नहीं है। यह भविष्य के लिए नजीर बन जाएगा। इससे आउटसोर्सिंग कर्मियों की नौकरी पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी। सरकार को नई कंपनी का चयन करने से पहले सैकड़ों बेरोजगारों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।
वहीं, 108 और खुशियों की सवारी के पूर्व कर्मियों ने 28 मई को परिवार समेत सचिवालय कूच करने की चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि शांतिपूर्वक धरनास्थल पर आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन सरकार की कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। ऐसे में अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष विपिन जमलोकी ने कहा कि सरकार को जल्द उनके संबंध में फैसला लेना चाहिए।
जांच भटकाने को बनाई एसआईटी
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य सरकार ने एनएच 74 मामले की जांच भटकाने के लिए एसआईटी बनाई। कांग्रेस शुरुआत से ही इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रही है, लेकिन सरकार ने एसआईटी का गठन किया। दिखाने के लिए कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया, लेकिन अब सभी को बहाल कर दिया गया है। यह सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की पोल खोलने के लिए काफी है।
छुपकर घर नहीं बैठूंगा
नैनीताल लोक सभा सीट पर बड़ी हार झेलने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने छुपकर घर बैठने से इनकार किया है। मीडिया से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि वह हार से नहीं घबराते। जनता के फैसले का वह सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा संघर्ष की राजनीति की है, जो आगे भी जारी रहेगी।