इंश्योरेंस कंपनी को किसानों को मुआवजा देने का आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। मुआवजे के नाम पर पांच सालों से किसानों को टरका रही इंश्योरेंस कंपनी को अब मुआवजे साथ मानसिक क्षति का हर्जाना भी देना होगा। जिला उपभोक्ता फोरम ने मंगलवार को आठ मामलों में एक साथ एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया पर प्रत्येक किसान को मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही प्रत्येक किसान को कंपनी 10-10 हजार रुपये मानसिक क्षति के अदा करेंगी। यह धनराशि 30 दिनों में देनी होगी।
मंगलवार को भूपेंद्र सिंह दुग्ताल की अध्यक्षता वाली जिला उपभोक्ता फोरम ने आठ किसानों के पक्ष में यह निर्णय दिया है। सबसे पहले जून 2014 में कृष्णा सिंह रावत निवासी बनगई भोगपुर ने फोरम को एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार उन्होंने वर्ष 2013 में लीची के 50 पेड़ों का इंश्योरेंस इस कंपनी से कराया था। इसके प्रीमियम के तौर पर 12 फीसदी रकम कंपनी को अदा की गई थी। इस प्रीमियम में 50 फीसदी हिस्सा किसान का और 25-25 फीसदी हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार ने अदा किया था। इस तरह कुल तीन हजार रुपये कृष्ण सिंह रावत ने इंश्योरेंस कंपनी को प्रीमियम के तौर पर दिए थे। फसल अच्छी हुई थी, लेकिन जून 2013 में ही पूरे प्रदेश में भयंकर आपदा आ गई। इससे उनकी फसल बारिश के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गई। यही नहीं सभी पेड़ भी अत्यधिक बारिश में बेकार हो गए।
इस पर कृष्ण सिंह रावत ने उद्यान अधिकारी के साथ-साथ इंश्योरेंस कंपनी को भी क्षतिपूर्ति के लिए सूचना दी। उद्यान विभाग की टीम ने तो बाग का दौरा किया, मगर इंश्योरेंस कंपनी ने सुध नहीं ली। मामला जब उपभोक्ता फोरम में पहुंचा तो इंश्योरेंस कंपनी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कंपनी केंद्र सरकार के नियमों को भी छुपाने लगी। इस पर फोरम ने इस मामले में इंश्योरेंस कंपनी की ही लापरवाही मानी, जिसमें प्रत्येक किसान को प्रति पेड़ एक हजार रुपये की दर से मुआवजा, 10 हजार रुपये मानसिक क्षति और पांच हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।
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देने होंगे 7.95 हजार रुपये
अब कंपनी को सभी किसानों को कुल 7.95 लाख रुपये हर्जाना देना होगा। जिसमें कृष्ण सिंह रावत को मुआवजा के रूप में 50 हजार, फूल सिंह को 70 हजार रुपये, सत्यदेव को ढाई लाख रुपये, रतन सिंह आर्य को एक लाख रुपये, रवि भूषण को 50 हजार रुपये, संजीव कुमार नेगी को 25 हजार रुपये और देवेंद्र सिंह को 30 हजार मुआवजे के रूप में मिलेंगे। 30 दिन की अवधि के बाद कंपनी को यह पैसा नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ किसानों को देना होगा।