फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटी वाले घर में हमेशा रहती है रौनक और बरकत : अनीता

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
विज्ञापन

केंद्रीय तिब्बतन विद्यालय हरबर्टपुर में अमर उजाला अपराजिता महा अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता स्कूल की प्रिंसिपल अनीता नरुला ने कहा कि मुझे गर्व है मैं नारी हूं। जिस घर में बेटी है उस घर में हमेशा रौनक और बरकत रहती है। नारी को कमजोर नहीं समझना चाहिए। उन्हें अवसर मिले तो वे आसमान छू सकतीं हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं पूरे परिवार का ध्यान रखतीं हैं वह पूरी जिंदगी बेटी, बहन, पत्नी, मां, सास और दादी जैसे रिश्तों को ईमानदारी से निभातीं हैं। इन सभी रिश्तों को निभाने के बाद भी वह पूरी शक्ति से नौकरी करतीं हैं। ताकि अपना, परिवार का और देश का भविष्य उज्ज्वल बना सकें। उन्होंने बताया कि विद्यालय में भी छात्रों के विपरीत छात्राओं की संख्या अधिक है। स्कूल की सभी बेटियां विद्यालय, समाज और देश का गौरव बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर अमर उजाला अपराजिता महा अभियान की यह पहल सराहनीय है। विद्यालय अमर उजाला के इस मिशन को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।
विज्ञापन

कार्यक्रम में स्कूल की शिक्षिका प्रतिभा शर्मा ने काव्य पाठ किया। उन्होंने कहा कि बाबुल की बेशकीमती थाती हैं बेटियां और बेटे अगर चिराग हैं तो बाती हैं बेटियां।
----
ये रहे मौजूद
डावा नोरबू, रीता बाली, प्रतिभा शर्मा, डॉ. एपी सिंह, पीएल सिंह, किरन लाल, सुष्मिता पांडे, सुषमा बहुगुणा, मधु पंत, ऊषा रानी, डीएल लेखवाड़, जय कुंवर, तरुणा जोशी, आरके गुप्ता, रमेश चंद्र, फुरबू डोलमा, यूएस बिष्ट, टी वांग्मो, संजीव कुमार, शेरब टेडर, डोरजी डोलमा, ज्योति रानी, नारायण दत्त उपाध्याय, पवन कुमार नौटियाल, यशी लाहोम, शालिनी गुप्ता, निधि रावत, मनमीत कौर, तबस्सुम नाज, राजेंद्र कुमार, राम चंद्र, अजब सिंह, राजेश कुमार आदि।
----
नजर नहीं नजरिया बदलने की जरूरत
- छात्र-छात्राओं ने दी नाटक की शानदार प्रस्तुति

अमर उजाला ब्यूरो
विकासनगर। स्कूल की कक्षा नौंवी की छात्रा प्रियांशी, माही, श्रेया, पलक, याशिका, दिव्यांशी, साक्षी, सोनिन, कनिका, ऋतिका, प्रिया, मुदित, विशाल और प्रथम ने शानदार नाटक प्रस्तुत किया। छात्रों ने नाटक से बताया गया कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए नजर नहीं बल्कि नजरिया बदलने की जरूरत है।
बच्चों ने नाटक में दर्शाया कि प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद कुछ महिलाएं अपनी बेटियों का स्कूल में एडमिशन नहीं होने देतीं। वे चाहती हैं कि उनकी बेटियां स्कूल न जाकर उनकी तरह घर के कामकाज में हाथ बटाएं। वे कहती हैं कि उन्होंने भी पढ़ाई नहीं कि ऐसे में उनकी बेटियां भी पढ़ लिखकर क्या करेंगी। इस बीच उनकी मुलाकात एक शिक्षिका से होती है, जो उन्हें बताती है कि पढ़ाई का जीवन में कितना महत्व है। शिक्षिका उन महिलाओं को समझाती है कि आज नहीं बल्कि अभी से अपनी बेटियों को स्कूल भेजें। शिक्षा से बेटियां सशक्त बनेंगी और घर, परिवार, समाज व देश का मान बढ़ाएंगी।
----
समाज में समय के साथ ही बदलाव आ रहा है। महिलाएं सशक्त हुई हैं और विभिन्न क्षेत्रों में आगे आ रहीं हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल सहित विभिन्न क्षेत्रों में वे परचम लहरा रहीं हैं। महिला सशक्तीकरण की इस मुहिम को दूरदराज के गांवों तक ले जाना होगा। -रीता बाली, शिक्षिका
----
नारी श्रद्धा, विश्वास और त्याग की प्रतिमूर्ति है। बेटी के जन्म लेने पर उत्सव मनाया जाना चाहिए और उसे पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहिए। वह पढ़ेगीं तो घर, परिवार और समाज शिक्षित होगा और देश तरक्की करेगा। -मधु पंत, शिक्षिका
----
बोर्ड परीक्षाएं हों या फिर प्रतियोगी परीक्षाएं बेटियां हर क्षेत्र में परचम लहरा रहीं हैं। सीबीएसई की इंटरमीडिएट परीक्षा में भी बेटियों का बेहतर प्रदर्शन रहा है। बेटियां हर शक्ति क्षेत्र में परचम लहरा रहीं हैं। -प्रतिभा शर्मा, शिक्षिका
----
लोग चाहते हैं कि उनकी बहू पढ़ी लिखी हो, लेकिन दूसरी ओर उन्हें पढ़ाने को तैयार नहीं हैं। इसके बावजूद बेटियों ने साबित कर दिया है कि वह बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्हें अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे आसमान छू सकतीं हैं। -अंशिका शर्मा, छात्रा
----
कन्या भ्रूण हत्या पर अब भी पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई है। यही वजह है कि लिंगानुपात में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में कमी आई है। हमें बेटा, बेटी के इस भेदभाव को दूर करने के लिए समाज को जागरूक करना होगा। -पवन नौटियाल, शिक्षक
----
बेटियों को लेकर पुरानी सोच में बदलाव लाना होगा। बेटियां, बेटों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। एक बेटी 10 बेटों के समान है, वह हर क्षेत्र में बेहतर कर रहीं हैं। -तरुणा जोशी
विज्ञापन

----
महिला सशक्तीकरण को लेकर अमर उजाला की ओर से शुरू किया गया अपराजिता महा अभियान सराहनीय है। निश्चित रूप से इससे स्थिति सुधरेगी। कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में लोग जागरूक होंगे और समझेंगे कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं है। -टी प्रीतम, उप निदेशक सीटीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें