अमर उजाला अपराजिता महा अभियान के तहत बुधवार को विकास निकेतन पब्लिक स्कूल डांडा जीवनगढ़ में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता स्कूल के प्रिंसिपल शैलेश सागर नौटियाल ने कहा कि बदलते दौर में महिलाएं अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खुद आगे आ रहीं हैं।
यदि उनके साथ कहीं कुछ गलत होता है तो इसके खिलाफ वे संगठित होकर आवाज उठा रहीं हैं। स्कूल में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और महिला सशक्तीकरण पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बेटों के समान सुविधाएं और अधिकार बेटियों को भी दिए जाने चाहिए। आज बेटियां बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। बोर्ड परीक्षाएं हों या प्रतियोगी परीक्षाएं बेटियां हर क्षेत्र में परचम लहरा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी बेटी को यदि लगता है कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है तो वह सबसे पहले अपने माता पिता और शिक्षकों को बताए। स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल मोहिनी नौटियाल ने कहा कि महिलाएं शिक्षित होंगी तभी सशक्त होंगी। अपने अधिकारों की बात हो या फिर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हो बगैर शिक्षा के कुछ संभव नहीं है। कार्यक्रम में विनय कांत नौटियाल, शिखा नौटियाल, शीतल, प्रियंका, मोनू माहार, मंजू, पूजा, निशि, प्रेरणा आदि मौजूद रहे।
महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव की जरूरत है। जब तक महिलाओं के प्रति पुरानी सोच में बदलाव नहीं आएगा कुछ संभव नहीं है। सोच में बदलाव के लिए अमर उजाला अपराजिता के तहत चलाया गया यह महा अभियान सराहनीय है।
- मंजू, शिक्षिका
बदलते दौर में बालिकाओं के लिए हर क्षेत्र में बहुत संभवनाएं हैं, जरूरत है तो सिर्फ यह कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। जागरुकता तभी आएगी जब वे शिक्षित होंगी।
- मोहिनी नौटियाल, पूर्व प्रिंसिपल
बेटियां बोझ नहीं हैं, एक बेटी 10 बेटों के बराबर है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर और प्रोत्साहन की जरूरत है। यदि उन्हें यह मिले तो वे आसमान छू सकतीं हैं। -जनक प्रवीन, छात्रा
शिक्षित नारी अपनी तीन पीढ़ियों को शिक्षित करती हैं, वे शिक्षित होंगी तो समाज से कुरीतियों को दूर किया जा सकेगा। इसलिए सबसे पहले उन्हें शिक्षित होना होगा। -शीतल शर्मा, शिक्षिका
बेटा और बेटी समान हैं, बेटियों को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए। उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेटों के समान अवसर दिए जाने चाहिए। अवसर मिले तो वे बेटों से बेहतर कर सकतीं हैं। -अंजली छात्रा
महिलाओं के प्रति समाज में काफी हद तक बदलाव आया है। अब महिलाएं अपने निर्णय खुद ले सकतीं हैं। कई संस्थान ऐसे हैं जिन्हें केवल महिलाएं संचालित कर रही हैं। हमें गर्व है कि हम हिंदुस्तान की बेटी हैं। -प्रियंका चौहान, शिक्षिका
महिलाएं कमजोर नहीं हैं। प्रथम महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला अपराजिता की बड़ी मिसाल हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। -विकास नेगी, छात्र
बेटियों को सम्मान और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। इसकी शुरुआत हमें अपने घर और स्कूल से करनी होगी। बेटियों को प्रोत्साहन मिलेगा तो वे बुलंदियां छू सकेंगी। -सोनू माहार, शिक्षिका