ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
राज्य के एकमात्र मानसिक स्वास्थ्य संस्थान सेलाकुई में संसाधनों के अभाव के कारण मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। संस्थान में मरीजों के लिए पर्याप्त बैड नहीं हैं। साथ ही महत्वपूर्ण चिकित्सक और अन्य कर्मियों के पद भी सृजित नहीं हैं। जबकि, संस्थान में राज्य के कई अस्तपालों से मरीजों को रेफर किया जाता है।
प्रदेश में मानसिक रोगियों की दशा चिंतनीय बनी हुई है। करीब एक करोड़ की जनसंख्या पर प्रदेश में मात्र एक मानसिक स्वास्थ्य संस्थान है। वर्ष 2008 में सेलाकुई में स्थापित इस संस्थान में मात्र 30 बैड की सुविधा है, जिनमें से 13 बैड महिला और इतने ही पुरुष रोगियों के लिए हैं। जबकि, चार प्राइवेट बैड की सुविधा है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के लिए अनिवार्य क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) का पद ही सृजित नहीं है, जिसके कारण यहां भर्ती गंभीर मरीजों को विशेष थैरेपी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। टेक्नीशियन और निश्चेतक के पद भी संस्थान में सृजित नहीं है। दोनों ही पद सृजित नहीं होने मरीजों को उपचार के दौरान शॉक दिए जाने की सुविधा भी मुहैया नहीं हो रही है। संस्थान में दो साइकैट्रिस्ट की तैनाती की गई है, जिनमें से एक चिकित्सक तीन दिन दून अस्पताल में अपनी सेवाएं देते हैं। जबकि, दो मेडिकल ऑफिसर तैनात हैं। संस्थान में दो-दो चिकित्सक होने से तीसरी शिफ्ट में चिकित्सकों की तैनाती ही नहीं हो पाती।
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महत्वपूर्ण पदों को सृजित करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब संस्थान को 100 बैड की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बाद सभी पदों के सृजित होने की उम्मीद है। -डॉ. अभिषेक गुप्ता, प्रभारी चिकित्साधिकारी