चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को घर और मंदिरों में मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की उपासना की गई। श्रद्धालुओं ने मां की चौकी के समक्ष दुर्गा सप्तसती पाठ किया और भोग प्रसाद बांटा। भक्तों ने दधाना करपदमाभ्यामक्षमालाकमंडलू, देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा का जाप किया।
मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप की पूजा-अर्चना के लिए कालसी, विकासनगर, डाकपत्थर, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई, झाझरा आदि मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। सनातन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का अपना अलग महत्व है। ब्रह्मचारिणी को तप का आचरण करने वाली देवी माना जाता है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला व बाएं हाथ में कमंडल रहता है। ब्रह्मचारिणी की उपासना के दौरान साधक अपने मन को मां के चरणों में लगाते हैं। इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
आज होगी मां चंद्रघंटा की पूजा
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन सोमवार को घरों और मंदिरों में मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाएगी। मान्यता है कि मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से भक्तों के कष्ट हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। उनमें शेर की तरह पराक्रम आता है। मां चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार का आधा चांद बना है, इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहते हैं। इनका रूप सोने की तरह चमकीला होता है। दस हाथ हैं और सभी में शस्त्र और बाण पकड़े हुए दिखती हैं। शेर इनकी सवारी है।